वैशेषिक दर्शन : पदार्थ, द्रव्य और परमाणु सिद्धांत (Vaisheshika Darshan)
प्रस्तावना
वैशेषिक दर्शन भारतीय षड्दर्शन परम्परा का वह तर्कप्रधान दर्शन है जो पदार्थों के सूक्ष्म विश्लेषण द्वारा यथार्थ का बोध कराता है। यह दर्शन जगत को वास्तविक मानते हुए उसके घटक तत्वों—द्रव्य, गुण, कर्म—का वैज्ञानिक वर्गीकरण करता है। महर्षि कणाद (उलूक) इसके प्रवर्तक माने जाते हैं। वैशेषिक दर्शन का उद्देश्य केवल पदार्थ-विज्ञान नहीं, बल्कि अज्ञान-निवृत्ति द्वारा मोक्ष है।
वैदिक पृष्ठभूमि और कणाद परम्परा
वैशेषिक दर्शन का मूल वैदिक है। ऋग्वेद और उपनिषदों में द्रव्य, गुण और क्रिया के संकेत मिलते हैं। कणाद ने इन संकेतों को सूत्रात्मक, तर्कसंगत और वैज्ञानिक रूप दिया। उनका प्रसिद्ध सूत्र—
धर्मः तदुत्कर्षकारणम् दर्शन के नैतिक उद्देश्य को रेखांकित करता है।
वैशेषिक दर्शन का लक्ष्य
- यथार्थ का वर्गीकरण और बोध
- मिथ्या कल्पनाओं का निराकरण
- कारण-कार्य सिद्धांत की स्थापना
- आत्मा के बंधन का निवारण
- मोक्ष (दुःखों का पूर्ण अभाव)
षट्पदार्थ सिद्धांत (Six Categories)
कणाद ने जगत को समझने हेतु छः पदार्थ बताए:
1. द्रव्य (Substance)
वे आधार जिनमें गुण और कर्म स्थित होते हैं। नौ द्रव्य माने गए हैं:
- पृथ्वी
- जल
- तेज (अग्नि)
- वायु
- आकाश
- काल
- दिक्
- आत्मा
- मन
2. गुण (Quality)
द्रव्य में स्थित, स्वयं स्वतंत्र नहीं। जैसे—रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, संयोग, विभाग, बुद्धि, सुख-दुःख आदि।
3. कर्म (Action)
द्रव्य में होने वाली गति—उत्क्षेपण, अवक्षेपण, आकुञ्चन, प्रसारण, गमन।
4. सामान्य (Generality)
वस्तुओं में व्याप्त सामान्य तत्त्व, जैसे—घटत्व।
5. विशेष (Particularity)
परमाणुओं में भेद कराने वाला तत्त्व। यही दर्शन का नाम वैशेषिक का आधार है।
6. समवाय (Inherence)
अविच्छिन्न सम्बन्ध—जैसे द्रव्य-गुण का सम्बन्ध।
परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory)
वैशेषिक दर्शन का अद्वितीय योगदान परमाणु सिद्धांत है। इसके अनुसार:
- परमाणु अविभाज्य, नित्य हैं
- द्वयणुक → त्रयणुक → स्थूल पदार्थ
- सृष्टि संयोजन से, प्रलय विघटन से
यह सिद्धांत आधुनिक विज्ञान के परमाणुवाद से आश्चर्यजनक साम्य रखता है।
कारण-कार्य सिद्धांत
वैशेषिक दर्शन असत्कार्यवाद को स्वीकार करता है—कार्य कारण में अव्यक्त रूप से नहीं, बल्कि नवीन रूप से उत्पन्न होता है।
आत्मा, मन और ईश्वर
आत्मा
आत्मा नित्य, चेतन और कर्मफल का भोक्ता है।
मन
मन अणु रूप, एककालिक—इन्द्रियों का संयोजक।
ईश्वर
उत्तर-वैशेषिक में ईश्वर को निमित्त कारण माना गया—सर्वज्ञ, नियन्ता।
दुःख, बंधन और मोक्ष
दुःख का कारण—अविद्या, राग-द्वेष, कर्म। मोक्ष—दुःखों का पूर्ण अभाव, पुनर्जन्म से निवृत्ति।
न्याय–वैशेषिक सम्बन्ध
न्याय और वैशेषिक परस्पर पूरक हैं:
- न्याय: प्रमाण और तर्क
- वैशेषिक: पदार्थ और तत्वमीमांसा बाद में दोनों का संयुक्त न्याय–वैशेषिक दर्शन विकसित हुआ।
आधुनिक विज्ञान से साम्य
- परमाणुवाद
- कारण-कार्य नियम
- वर्गीकरण पद्धति
- यथार्थवाद
आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता
- वैज्ञानिक सोच
- तार्किक निर्णय
- पदार्थ-जगत का यथार्थ बोध
- अध्यात्म में विवेक
FAQ
Q. क्या वैशेषिक नास्तिक है?
नहीं। उत्तर-वैशेषिक ईश्वर को स्वीकार करता है।
Q. क्या जगत मिथ्या है?
नहीं, वैशेषिक यथार्थवादी है।
निष्कर्ष
वैशेषिक दर्शन भारतीय बौद्धिक परम्परा का वैज्ञानिक स्तम्भ है। यह पदार्थ से आत्मा तक, तर्क से मोक्ष तक की यात्रा कराता है। द्रव्य, गुण और परमाणु के सूक्ष्म विवेचन द्वारा यह दर्शन सिद्ध करता है कि यथार्थ का ज्ञान ही मुक्ति का द्वार है।

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