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ऋषि कौन थे? वैज्ञानिक या दार्शनिक — वैदिक दृष्टि से सत्य

 


ऋषि कौन थे?

वैज्ञानिक या दार्शनिक — वैदिक दृष्टि से सत्य


भूमिका

आधुनिक दृष्टि
ऋषियों को—

  • केवल साधु
  • केवल धार्मिक व्यक्ति
  • केवल मंत्र रचयिता

मान लेती है।

पर वेद स्वयं कहते हैं—

ऋषि वह नहीं जो कल्पना करे,
ऋषि वह है जो देखे।

संस्कृत में “ऋषि” शब्द
द्रष्टा के अर्थ में आता है।

उपनिषद क्या हैं सरल भाषा में उपनिषदों अर्थ और उद्देश्य 


ऋषि शब्द का वास्तविक अर्थ

“ऋषि” = ऋष् + इ

ऋष् धातु का अर्थ—

  • देखना
  • अनुभव करना
  • प्रत्यक्ष जानना

इसलिए ऋषि—

जो सत्य को
प्रत्यक्ष अनुभव करे।


क्या ऋषि वैज्ञानिक थे?

यदि विज्ञान का अर्थ—

  • निरीक्षण
  • प्रयोग
  • सत्यापन

है,
तो ऋषि निश्चित ही वैज्ञानिक थे।

पर—

वे बाहरी वस्तुओं के नहीं,
चेतना के वैज्ञानिक थे।


ऋषियों का प्रयोग क्षेत्र

आधुनिक विज्ञान—

  • पदार्थ पर प्रयोग करता है

ऋषि—

  • मन पर
  • चेतना पर
  • अस्तित्व पर

प्रयोग करते थे।

उनकी प्रयोगशाला—

स्वयं का अंतःकरण था।

 उपनिषद का गूढ़ रहस्य आत्मा ब्रह्म और जीव


मंत्र: कल्पना या खोज?

वेद कहते हैं—

मंत्र बनाए नहीं गए
मंत्र “देखे” गए।

इसीलिए कहा गया—

“मंत्रद्रष्टा ऋषि”

ऋषि ने—

  • शब्द नहीं गढ़े
  • सत्य को ध्वनि में प्रकट किया

ऋषि और दर्शन

ऋषि दार्शनिक भी थे,
पर केवल तर्कवादी नहीं।

उनका दर्शन—

  • अनुभव आधारित
  • प्रत्यक्ष प्रमाणित

था।

इसीलिए उपनिषदों में—

तर्क से अधिक
अनुभूति को महत्व है।


ऋषि और आधुनिक वैज्ञानिक में अंतर

आधुनिक वैज्ञानिक वैदिक ऋषि
बाहरी जगत का अध्ययन आंतरिक जगत का अध्ययन
उपकरणों पर निर्भर ध्यान पर निर्भर
सीमित प्रयोग सम्पूर्ण चेतना पर प्रयोग
परिणाम पदार्थ तक परिणाम आत्मबोध तक

क्या ऋषि केवल दार्शनिक थे?

नहीं।

ऋषि—

  • समाज निर्माता
  • संस्कृति निर्माता
  • जीवन मार्गदर्शक

थे।

उन्होंने—

  • आचार
  • शिक्षा
  • चिकित्सा
  • शासन

सभी पर दिशा दी।


ऋषि और नैतिक विज्ञान

ऋषि केवल ज्ञान नहीं देते थे,
वे जीवन जीने की कला सिखाते थे।

उनके लिए—

सत्य = आचरण + ज्ञान

इसीलिए वैदिक ज्ञान
केवल ग्रंथ नहीं,
जीवन पद्धति है।


ऋषि और प्रकृति

ऋषि—

  • प्रकृति के शासक नहीं
  • प्रकृति के सहचर थे

इसलिए—

  • सूर्य देवता बना
  • अग्नि देवता बनी
  • वायु देवता बने

यह देवता नहीं,
प्राकृतिक शक्तियों की समझ थी।


ऋषियों की सबसे बड़ी खोज

ऋषियों की सबसे बड़ी खोज—

आत्मा की खोज

उन्होंने जाना—

  • शरीर मैं नहीं हूँ
  • मन मैं नहीं हूँ
  • विचार मैं नहीं हूँ

“अहं ब्रह्मास्मि”


आधुनिक युग में ऋषियों की आवश्यकता

आज—

  • जानकारी बहुत है
  • दिशा नहीं है

ऋषि हमें सिखाते हैं—

पहले स्वयं को जानो,
फिर संसार को।


निष्कर्ष

ऋषि—

  • केवल वैज्ञानिक नहीं
  • केवल दार्शनिक नहीं

वे थे—

चेतना के वैज्ञानिक
अनुभूति के दार्शनिक
जीवन के मार्गदर्शक

ऋषियों का ज्ञान
आज भी उतना ही जीवित है
जितना हजारों वर्ष पहले था।



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Agnipuran Chapter 20