अग्नि पुराण – वराहाद्यवतारवर्णनम्
🔸 श्लोक 1 – Sanskrit
अवतारं वराहस्य वक्ष्येऽहं पापनाशनम् ।
हिरण्याक्षोऽसुरेशोऽभूद् देवान् जित्वा दिवि स्थितः ॥ १ ॥
🔸 श्लोक 1 – हिन्दी व्याख्या
मैं वराहावतार का वर्णन करूँगा, जो पापों के नाश के लिए हुआ।
हिरण्याक्ष, जो असुरों का राजा था, देवताओं को हराकर आकाश में स्थित हुआ।
🔸 Shloka 1 – English Translation
I shall describe the Varaha avatar, which was for the destruction of sins.
Hiranyaksha, the king of demons, was defeated by the gods and was established in the sky.
🔸 श्लोक 2 – Sanskrit
देवैर्गत्वा स्तुतो विष्णुर्यज्ञरूपो वराहकः ।
अभूत् तं दानवं हत्वा दैत्यैः साकञ्च कण्टकम् ॥ २ ॥
🔸 श्लोक 2 – हिन्दी व्याख्या
देवों के पास जाकर विष्णु की स्तुति की गई, जो यज्ञरूप में वराह रूप धारण किए।
उन्होंने उस दानव को मारा और अन्य दैत्य तथा कांटे हटा दिए।
🔸 Shloka 2 – English Translation
He approached the gods and was praised; Vishnu, in the form of Varaha,
killed the demon and removed other demons and obstacles.
🔸 श्लोक 3 – Sanskrit
धर्मदेवादिरक्षाकृतं ततः सोऽन्तर्द्दधे हरिः।
हिरण्याक्षस्य वै भ्राता हिरण्यकशिपुस्तथा ॥ ३ ॥
🔸 श्लोक 3 – हिन्दी व्याख्या
तत्पश्चात हरि ने धर्म, देव आदि की रक्षा की।
हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकशिपु भी ऐसा ही था।
🔸 Shloka 3 – English Translation
Then Hari protected Dharma and the gods.
Hiranyaksha’s brother, Hiranyakashipu, was also like him.
🔸 श्लोक 4 – Sanskrit
जितदेवयज्ञभागः सर्वदेवाधिकारकृत्।
नारसिंहवपुः कृत्वा तं जघान सुरैः सह ॥ ४ ॥
🔸 श्लोक 4 – हिन्दी व्याख्या
सर्वदेवों की अनुमति से नारसिंह रूप में, उन्होंने उस दैत्य को देवों के साथ मिलकर हराया।
🔸 Shloka 4 – English Translation
With the consent of all gods, in Narasimha form, he killed that demon along with the gods.
🔸 श्लोक 5 – Sanskrit
स्वपदस्थान् सुरांश्चक्रे नारसिंहः सुरैः स्तुतः।
देवासुरे पुरा युद्धे बलिप्रभृतिभिः सुराः ॥ ५ ॥
🔸 श्लोक 5 – हिन्दी व्याख्या
नारसिंह ने अपने स्थान पर रहते हुए देवताओं के साथ युद्ध किया और वे सभी उसकी स्तुति करने लगे।
पूर्व में देवता और असुरों ने बलि आदि के साथ युद्ध किया था।
🔸 Shloka 5 – English Translation
Narasimha, in his place, fought alongside the gods and was praised by them.
Earlier, the gods and demons had fought with Bali and others.
🔸 श्लोक 6 – Sanskrit
जिताः स्वर्गात्परिभ्रप्टा हरिं वै शरणं गताः।
सुराणाममयं दत्त्वा अदित्या कश्यपेन च ॥ ६ ॥
🔸 श्लोक 6 – हिन्दी व्याख्या
स्वर्ग से भटक गए देव हरि की शरण में आए।
उन्होंने देवताओं को यह अमृत दिया और साथ ही अदित्या और कश्यप को भी।
🔸 Shloka 6 – English Translation
The gods, having been driven from heaven, took refuge in Hari.
He gave them the nectar and also to Aditya and Kashyapa.
🔸 श्लोक 7 – Sanskrit
स्तुतोऽसौ वामनो भूत्वा ह्यदित्यां स क्रतुं ययौ।
बलेः श्रीयजमानस्य, राजद्वारेऽगृणात् श्रुतिम् ॥ ७ ॥
🔸 श्लोक 7 – हिन्दी व्याख्या
वामन रूप में प्रकट होकर उन्होंने अदित्य के यहाँ यज्ञ किया।
संबंधित बल और यज्ञ की महिमा से राजदरवाजे तक इसकी ध्वनि पहुँची।
🔸 Shloka 7 – English Translation
Manifested as Vamana, he performed a sacrifice at Aditya’s place.
The power and glory of the ritual were heard even at the royal gates.
🔸 श्लोक 8 – Sanskrit
वेदान् पठन्तं तं श्रुत्वा वामनं वरदोऽब्रवीत्।
निवारितोऽपि शुक्रेण बलिर्ब्रूहि यदिच्छसि ॥ ८ ॥
🔸 श्लोक 8 – हिन्दी व्याख्या
जब वेदों का पठन करते हुए वामन को देखा गया, तो वरदान देने वाले ने कहा:
"शुक्र के द्वारा रोकने के बावजूद, बलि, जो भी तुम चाहते हो, कहो।"
🔸 Shloka 8 – English Translation
Seeing Vamana reciting the Vedas, the granter of boons said:
"Even though prevented by Shukra, Bali, tell me what you desire."
🔸 श्लोक 9 – Sanskrit
त्तत्तेऽहं सम्प्रदास्यामि, वामनो बलिमब्रवीत्।
पदत्रयं हि गुर्वर्थं देहि दास्ये तमब्रवीत् ॥ ९ ॥
🔸 श्लोक 9 – हिन्दी व्याख्या
वामन ने बलि से कहा: "मैं तुझे तीन पाद जमीन दान में देने के लिए कहता हूँ।
यह तीन पाद ही इस महान कार्य के लिए पर्याप्त हैं।"
🔸 Shloka 9 – English Translation
Vamana said to Bali: "I ask you to grant me three paces of land.
These three paces are sufficient for this great purpose."
🔸 श्लोक 10 – Sanskrit
तोये तु पतिते हस्ते वामनोऽभूदवामनः।
भूर्लोकं स भुवर्लोकं स्वर्लोकञ्च पदत्रयम् ॥ १० ॥
🔸 श्लोक 10 – हिन्दी व्याख्या
जब वामन के हाथ में जल (वस्तु) रखा गया, तो वह वामन रूप धारण कर लिया।
उसने तीन पादों में पृथ्वी, भुवर्लोक और स्वर्ग को नाप लिया।
🔸 Shloka 10 – English Translation
When water was placed in his hand, Vamana assumed the Vamana form.
With his three steps, he measured the Earth, the Bhulok, and Swarga.
🔸 श्लोक 11 – Sanskrit
चक्रे बलिञ्च सुतलं तच्छक्राय ददौ हरिः।
शक्रो देवैर्हरिं स्तुत्वा भुवनेशः सुखीं त्वभूत् ॥ ११ ॥
🔸 श्लोक 11 – हिन्दी व्याख्या
हरि ने सुतल (भूमि) को अपने चक्र से मापा और उसका दान दिया।
इसी प्रकार इंद्र ने हरि की स्तुति की और भुवनेश्वर सुखी हुए।
🔸 Shloka 11 – English Translation
Hari measured Suthala (the land) with his discus and gave it as a gift.
Indra praised Hari, and the Lord of the worlds became pleased.
🔸 श्लोक 12 – Sanskrit
वक्ष्ये परशुरामस्य चावतारं श्रृणु द्विज।
उद्वतान् क्षत्रियान् मत्वा भूभारहाणाय सः ॥ १२ ॥
🔸 श्लोक 12 – हिन्दी व्याख्या
ब्राह्मणों सुनो! मैं परशुराम के अवतार का वर्णन करता हूँ।
उसने उठकर क्षत्रियों को उनकी अधीनता और पृथ्वी के भार से मुक्त किया।
🔸 Shloka 12 – English Translation
Listen, O Brahmins! I will narrate the incarnation of Parashurama.
He rose and subdued the Kshatriyas to relieve the burden on Earth.
🔸 श्लोक 13 – Sanskrit
अवतीर्णो हरिः शान्त्यै देवविप्रादिपालकः।
जमदग्ने रेणुकायां भार्गवः शस्त्रपारगः ॥ १३ ॥
🔸 श्लोक 13 – हिन्दी व्याख्या
हरि शांति स्थापित करने के लिए अवतरित हुए,
और जमदग्नि के घर रेणुका में, भर्गव (परशुराम) शस्त्रों में निपुण हुए।
🔸 Shloka 13 – English Translation
Hari incarnated to establish peace,
and at Renuka’s home, son of Jamadagni, Bhargava (Parashurama) became proficient in weapons.
🔸 श्लोक 14 – Sanskrit
दत्तात्रेयप्रसादेन कार्त्तवीर्यो नृपस्त्वभूत्।
सहस्त्रबाहुः सर्वोर्वीपतिः स मृगयां गतः ॥ १४ ॥
🔸 श्लोक 14 – हिन्दी व्याख्या
दत्तात्रेय की कृपा से कार्तवीर्य (राजा) उत्पन्न हुए।
सहस्त्रबाहु, सभी पातकों का निवारक, शिकार के लिए निकले।
🔸 Shloka 14 – English Translation
By the grace of Dattatreya, Kartavirya (the king) came into being.
Thousand-armed, the ruler of all, he went out for hunting.
🔸 श्लोक 15 – Sanskrit
श्रान्तो निमन्त्रितोऽरण्ये मुनिना जमदग्निना।
कामधेनुप्रभावेण भोजितः सबलो नृपः ॥ १५ ॥
🔸 श्लोक 15 – हिन्दी व्याख्या
थक कर जंगल में मुनि जमदग्नि ने उन्हें बुलाया।
कामधेनु की शक्ति से राजा को भोजन कराया गया।
🔸 Shloka 15 – English Translation
Weary, he was invited to the forest by the sage Jamadagni.
By the power of Kamadhenu, the king was provided a meal.
🔸 श्लोक 16 – Sanskrit
अप्रार्थयत् कामधेनुं यदा स न ददौ तदा।
हृतवानथ रामेण शिरश्छित्त्वा निपातितः ॥ १६ ॥
🔸 श्लोक 16 – हिन्दी व्याख्या
जब राजा ने कामधेनु से दान माँगा पर उसे न दी,
तब राम ने उसका सिर काट दिया और राजा का वध हुआ।
🔸 Shloka 16 – English Translation
When the king requested Kamadhenu and she did not give,
Rama beheaded him, and the king was killed.
🔸 श्लोक 17 – Sanskrit
युद्धे परशुना राजा धेनुः स्वाश्रममाययौ ।
कार्त्तवीर्यस्य पुत्रस्तु जमदग्निर्निपातितः ॥ १७ ॥
🔸 श्लोक 17 – हिन्दी व्याख्या
युद्ध में परशु से राजा ने धेनु (गाय) अपने आश्रम में भेजी।
कार्तवीर्य का पुत्र, जमदग्नि, मारा गया।
🔸 Shloka 17 – English Translation
In the battle with the axe, the king sent the cow to his ashram.
Jamadagni, son of Kartavirya, was killed.
🔸 श्लोक 18 – Sanskrit
रामे वनं गते वैरादथ रामः समागतः।
पितरं निहतं दृष्ट्वा पितृनाशाभिमर्षितः ॥ १८ ॥
🔸 श्लोक 18 – हिन्दी व्याख्या
राम जब वन में गए और दुश्मनों के कारण आए,
तो उन्होंने अपने पितर को मरा हुआ देखा और पितृनाश से क्रोधित हुए।
🔸 Shloka 18 – English Translation
When Rama went to the forest and encountered enemies,
he saw his fathers killed and was enraged at their destruction.
🔸 श्लोक 19 – Sanskrit
त्रिः सप्तकृत्वः पृथिवीं निःक्षत्रामकरोद्विभुः।
कुरुश्रेत्रे पञ्च कुण्डान् कृत्वा सन्तर्प्य वै पितृन् ॥ १९ ॥
🔸 श्लोक 19 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने तीन-सप्त बार पृथ्वी को निःक्षत्र किया और
कुरुक्षेत्र में पांच कुण्ड बनाकर अपने पितरों का तर्पण किया।
🔸 Shloka 19 – English Translation
Three times seven (21) he made the Earth free from kings,
and in Kurukshetra, he created five sacred ponds to offer oblations to his ancestors.
🔸 श्लोक 20 – Sanskrit
काश्यपाय महीं दत्त्वा महेन्द्रे पर्वते स्थितः।
कूर्म्मस्य च वराहस्य नृसिंहस्य च वामनम् ॥ २० ॥
🔸 श्लोक 20 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने पृथ्वी को कश्यप को दे दिया और
महेंद्र (इंद्र) के पर्वत में स्थिर होकर
कूर्म, वराह, नृसिंह और वामन के अवतारों का पालन किया।
🔸 Shloka 20 – English Translation
He gave the Earth to Kashyapa and, stationed on Mount Mahendra,
oversaw the incarnations of Kurma, Varaha, Narasimha, and Vamana.
🔸 श्लोक 21 – Sanskrit
अवतारं च रामस्य श्रुत्वा याति दिवं नरः ॥ २१ ॥
🔸 श्लोक 21 – हिन्दी व्याख्या
मनुष्य राम के अवतार को सुनकर दिव्य लोक की ओर जाता है।
🔸 Shloka 21 – English Translation
Hearing the incarnation of Rama, a human ascends to the divine realm.
🔸 श्लोक 1 – Sanskrit
रामायणमहं वक्ष्ये नारदेनोदितं पुरा।
वाल्मीकये यथा तद्वत् पठितं भुक्तिमुक्तिदम् ॥ १ ॥
🔸 श्लोक 1 – हिन्दी व्याख्या
मैं रामायण का वर्णन करूँगा, जो पहले नारद द्वारा बताया गया था।
जिस प्रकार वाल्मीकि में पढ़ा जाता है, वही यह भुक्ति और मोक्ष देने वाला है।
🔸 Shloka 1 – English Translation
I will narrate the Ramayana, which was previously told by Narada.
As it is read in Valmiki’s text, it grants both worldly enjoyment and liberation.
🔸 श्लोक 2 – Sanskrit
विष्णुनाभ्यव्जजो ब्रह्मा मरीचिर्ब्रह्मणः सुतः।
मरीचेः कश्यपस्तस्मात् सूर्यो वैवस्वतो मनुः ॥ २ ॥
🔸 श्लोक 2 – हिन्दी व्याख्या
विष्णु से उत्पन्न ब्रह्मा ने मरीच को उत्पन्न किया, जो ब्रह्मा का पुत्र था।
मरीच से कश्यप जन्मे, और उनके द्वारा सूर्यवंश का मनु उत्पन्न हुआ।
🔸 Shloka 2 – English Translation
From Vishnu, Brahma was born, and Brahma fathered Marichi.
From Marichi came Kashyapa, and through him arose the Solar dynasty’s Manu.
🔸 श्लोक 3 – Sanskrit
ततस्तस्मात्तथेक्ष्वाकुस्तस्य वंशे ककुत्स्थकः।
ककुत्स्थस्य रघुस्तस्मादजो दशरथस्ततः ॥ ३ ॥
🔸 श्लोक 3 – हिन्दी व्याख्या
तदनंतर, इसी प्रकार दक्षेस्वाकु वंश में ककुत्स्थ उत्पन्न हुआ।
ककुत्स्थ के वंश से रघु, और रघु से दशरथ उत्पन्न हुए।
🔸 Shloka 3 – English Translation
Then, in the Ikshvaku lineage, Kakutstha was born.
From Kakutstha came Raghu, and from Raghu was born Dasharatha.
🔸 श्लोक 4 – Sanskrit
रावणादेर्वधार्थाय चतुर्द्धाभूत स्वयं हरिः।
राज्ञो दशरथाद्रामः कौशल्यायां बभूव ह ॥ ४ ॥
🔸 श्लोक 4 – हिन्दी व्याख्या
रावण के वध के लिए, भगवान स्वयं चार-आयामी रूप में प्रकट हुए।
राजा दशरथ के घर में राम, कौशल्या के पुत्र के रूप में उत्पन्न हुए।
🔸 Shloka 4 – English Translation
For the purpose of killing Ravana, Hari himself took form.
He was born as Rama in King Dasharatha’s family, son of Kausalya.
🔸 श्लोक 5 – Sanskrit
कैकेय्यां भरतः पुत्रः सुमित्रायाञ्च लक्ष्मणः।
शत्रुघ्नः ऋष्यश्रृङ्गेण तासु सन्दत्तपायसात् ॥ ५ ॥
🔸 श्लोक 5 – हिन्दी व्याख्या
कैकेयी से भरत का जन्म हुआ,
सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म ऋष्यश्रृंग से हुआ।
सभी को पितर की पूजा हेतु विशेष संस्कार (पायस) दिया गया।
🔸 Shloka 5 – English Translation
Bharata was born to Kaikeyi,
Lakshmana and Shatrughna to Sumitra through Rishyasringa.
They were offered special rituals (payasa) for ancestral worship.
🔸 श्लोक 6 – Sanskrit
प्राशिताद्यज्ञसंसिद्धाद्राद्रामाद्याश्च समाः पितुः।
यज्ञविध्नविनाशाय विश्वामित्रार्थितो नृपः ॥ ६ ॥
🔸 श्लोक 6 – हिन्दी व्याख्या
राम सहित सभी पुत्रों को यज्ञ के लिए तैयार किया गया।
राजा विश्वामित्र के मार्गदर्शन में यज्ञ के बाधा निवारण हेतु गए।
🔸 Shloka 6 – English Translation
Rama and his brothers were sent for the yajna.
The king, guided by Vishwamitra, went to remove obstacles in the ritual.
🔸 श्लोक 7 – Sanskrit
रामं सम्प्रेषयामास लक्ष्मणं मुनिना सह।
रामो गतोऽस्त्रशस्त्राणि शिक्षितस्ताडकान्तकृत ॥ ७ ॥
🔸 श्लोक 7 – हिन्दी व्याख्या
विश्वामित्र ने लक्ष्मण के साथ राम को भेजा।
राम ने वहां पहुँचकर अस्त्र-शस्त्रों का प्रशिक्षण लिया और ताड़का तथा अन्य राक्षसों का नाश किया।
🔸 Shloka 7 – English Translation
Vishwamitra sent Rama along with Lakshmana.
Rama trained in weapons there and defeated the demon Tadaka and others.
🔸 श्लोक 8 – Sanskrit
मारीचं मानवास्त्रेण मोहितं दूरतोऽनयत्।
सुबाहुं यज्ञहन्तारं सबलञ्चावधीद् बली ॥ ८ ॥
🔸 श्लोक 8 – हिन्दी व्याख्या
राम ने मारीच को मानव रूप में देखा और उसे अपने बाण से दूर भगाया।
सुबाहु नामक यज्ञ बाधक राक्षस को उन्होंने बलपूर्वक हराया।
🔸 Shloka 8 – English Translation
Rama saw Maricha in human form and drove him away with his arrow.
He also defeated the demon Subahu, the Yajna-disturber, with great strength.
🔸 श्लोक 9 – Sanskrit
सिद्धाश्रमनिवासी च विश्वामित्रादिभिः सह।
गतः क्रतुं मैथिलस्य द्रष्टुञ्चापंसहानुजः ॥ ९ ॥
🔸 श्लोक 9 – हिन्दी व्याख्या
विश्वामित्र और अन्य ऋषियों के साथ, राम सिद्धाश्रम पहुँचे।
वहाँ उन्होंने सीता के पिता जनक और लक्ष्मण का मार्गदर्शन किया।
🔸 Shloka 9 – English Translation
Rama, along with Vishwamitra and other sages, went to the Siddhashram.
There he was instructed regarding King Janaka and Lakshmana.
🔸 श्लोक 10 – Sanskrit
शतानन्दनिमित्तेन विश्वामित्रप्रभावतः।
रामाय कथितो राज्ञा समुनिः पूजितः क्रतौ ॥ १० ॥
🔸 श्लोक 10 – हिन्दी व्याख्या
विश्वामित्र के प्रभाव और शतानंद के कारण,
राजा द्वारा राम के लिए कहा गया कि उन्हें यज्ञ में सम्मानित किया जाए।
🔸 Shloka 10 – English Translation
Due to Vishwamitra’s influence and Shatananda’s purpose,
the king instructed that Rama be honored in the yajna.
🔸 श्लोक 11 – Sanskrit
धनुरापूरयामास लीलया स बभञ्ज तत् ।
वीर्यशुल्कञ्च जनकः सीतां कन्यान्त्वयोनिजाम् ॥ ११ ॥
🔸 श्लोक 11 – हिन्दी व्याख्या
राम ने धनुष उठाकर उसे सहज रूप से तोड़ा।
सीता, जो जनक की कन्या थी, उसे युद्ध कौशल में परखा गया।
🔸 Shloka 11 – English Translation
Rama lifted the bow and broke it effortlessly.
Sita, daughter of Janaka, was thereby tested in her martial skill.
🔸 श्लोक 12 – Sanskrit
ददौ रामाय रामोऽपि पित्रादौ हि समागते।
उपयेमे जानकीन्तामुर्मिलां लक्ष्मणस्तथा ॥ १२ ॥
🔸 श्लोक 12 – हिन्दी व्याख्या
राम ने पिता के समक्ष, राम के लिए धनुष भेंट किया।
लक्ष्मण ने भी सीता की बहन के साथ यज्ञ में भाग लिया।
🔸 Shloka 12 – English Translation
Rama presented the bow before his father.
Lakshmana also accompanied Sita’s sister in the yajna.
🔸 श्लोक 13 – Sanskrit
श्रुतकीर्त्तिं माण्डवीञ्च कुशध्वजसुते तथा।
जनकस्यानुजस्यैते शत्रुघ्नभरतावुभौ ॥ १३ ॥
🔸 श्लोक 13 – हिन्दी व्याख्या
श्रुत कीर्ति और माण्डवी के पुत्र कुशध्वज के रूप में,
जनक की बहन के लिए शत्रुघ्न और भरत भी वहाँ उपस्थित हुए।
🔸 Shloka 13 – English Translation
Shrutakirti and Mandavi’s son Kushadhwaja,
as well as Shatrughna and Bharata, were present for Janaka’s daughter.
🔸 श्लोक 14 – Sanskrit
कन्ये द्वे उपयेमाते जनकेन सुपूजितः।
रामोऽगात्सवशिष्ठाद्यैर्जामदगन्यं विजित्य च।
अयोध्यां भरतोभ्यागात् सशत्रुघ्नो युधाजितः ॥ १४ ॥
🔸 श्लोक 14 – हिन्दी व्याख्या
जनक द्वारा सम्मानित दो कन्याओं के लिए,
राम ने सर्वश्रेष्ठ ऋषियों के मार्गदर्शन से जनक की परीक्षा पास की।
भरत और शत्रुघ्न अयोध्या से वहाँ पहुँचे।
🔸 Shloka 14 – English Translation
For the two daughters honored by Janaka,
Rama, guided by the sages, succeeded in the challenge.
Bharata and Shatrughna came from Ayodhya to witness.
🔸 श्लोक 6.001 – Sanskrit
नारद उवाच
भरतेऽथ गते रामः पित्रादीनभ्यपूजयत् ।
राजा दशरथो राममुवाच शृणु राघव ॥६.००१॥
🔸 श्लोक 6.001 – हिन्दी व्याख्या
नारद ने कहा –
जब भरत आए, तब राम ने अपने पिता और अन्य बड़े बुजुर्गों की पूजा की।
राजा दशरथ ने राम से कहा, "सुनो, राघव।"
🔸 Shloka 6.001 – English Translation
Narada said –
When Bharata arrived, Rama worshipped his father and other elders.
King Dasharatha spoke to Rama: "Listen, O Raghava."
🔸 श्लोक 6.002 – Sanskrit
गुणानुरागाद्राज्ये त्वं प्रजाभिरभिषेचितः ।
मनसाहं प्रभाते ते यौवराज्यं ददामि ह ॥६.००२॥
🔸 श्लोक 6.002 – हिन्दी व्याख्या
तुम अपने गुण और प्रजा के अनुराग के कारण राजतिलक किए जा रहे हो।
मैं तुम्हें आज प्रातः ही यौवराज्य का उत्तरदायित्व सौंपता हूँ।
🔸 Shloka 6.002 – English Translation
Because of your virtues and the affection of your people, you are being crowned.
I grant you the responsibilities of the crown this morning.
🔸 श्लोक 6.003 – Sanskrit
रात्रौ त्वं सीतया सार्धं संयतः सुव्रतो भव ।
राज्ञश्च मन्त्रिणश्चाष्टौ सवसिष्ठास्तथाब्रुवन् ॥६.००३॥
🔸 श्लोक 6.003 – हिन्दी व्याख्या
रात्रि में तुम सीता के साथ संयम और अच्छे नियमों के अनुसार रहो।
राजा और आठ मंत्रियों ने इस प्रकार से वचन दिया।
🔸 Shloka 6.003 – English Translation
At night, you should live with Sita in discipline and righteousness.
The king and the eight ministers spoke accordingly.
🔸 श्लोक 6.004 – Sanskrit
सृष्टिर्जयन्तो विजयः सिद्धार्थो राष्ट्रवर्धनः ।
अशोको धर्मपालश्च सुमन्त्रः सवसिष्ठकः ॥६.००४॥
🔸 श्लोक 6.004 – हिन्दी व्याख्या
सृष्टि, जयंत, विजय, सिद्धार्थ, राष्ट्रवर्धन, अशोक, धर्मपाल, सुमन्त्र और वसिष्ठ – ये सभी मंत्री और रक्षक थे।
🔸 Shloka 6.004 – English Translation
Srishti, Jayanta, Vijaya, Siddhartha, Rashtra-Vardhana, Ashoka, Dharmapala, Sumant, and Vasistha – these were all ministers and protectors.
🔸 श्लोक 6.005 – Sanskrit
पित्रादिवचनं श्रुत्वा तथेत्युक्त्वा स राघवः ।
स्थितो देवार्चनं कृत्वा कौशल्यायै निवेद्य तत् ॥६.००५॥
🔸 श्लोक 6.005 – हिन्दी व्याख्या
राम ने पिता के वचन सुनकर ऐसा ही किया।
उन्होंने देवताओं की पूजा की और उसे कौशल्या के लिए अर्पित किया।
🔸 Shloka 6.005 – English Translation
Hearing his father’s words, Rama acted accordingly.
He performed worship of the deities and offered it to Kaushalya.
🔸 श्लोक 6.006 – Sanskrit
राजोवाच वसिष्ठादीन् रामराज्याभिषेचने ।
सम्भारान् सम्भवन्तु स्म इत्युक्त्वा कैकेयीङ्गतः ॥६.००६॥
🔸 श्लोक 6.006 – हिन्दी व्याख्या
राजा ने वसिष्ठ और अन्य विद्वानों से कहा –
"राम के राज्याभिषेक के लिए सभी आवश्यक वस्तुएँ तैयार रहें।"
यह कहकर वे कैकेयी के पास गए।
🔸 Shloka 6.006 – English Translation
The king said to Vasistha and others –
"Let all preparations be ready for Rama’s coronation."
Then he went to Kaikeyi.
🔸 श्लोक 6.007 – Sanskrit
अयोध्यालङ्कृतिं दृष्ट्वा ज्ञात्वा रामाभिषेचनं ।
भविष्यतीत्याचचक्षे कैकेयीं मन्थरा सखी ॥६.००७॥
🔸 श्लोक 6.007 – हिन्दी व्याख्या
मंथरा, कैकेयी की सहेली ने अयोध्या की शोभा देखकर कहा –
"राम का अभिषेक निश्चित रूप से होगा।"
🔸 Shloka 6.007 – English Translation
Manthara, Kaikeyi’s maid, seeing the splendor of Ayodhya, said –
"Rama’s coronation is surely going to take place."
🔸 श्लोक 6.008 – Sanskrit
पादौ गृहीत्वा रामेण कर्षिता सापराधतः ।
तेन वैरेण सा राम वनवासञ्च काङ्क्षति ॥६.००८॥
🔸 श्लोक 6.008 – हिन्दी व्याख्या
राम के पाँव पकड़कर (मनसा) खींची गई, यह एक प्रकार की दुष्टता थी।
इस वजह से वह राम के वनवास की योजना करने लगी।
🔸 Shloka 6.008 – English Translation
By holding Rama’s feet, she pulled him (mentally), which was an act of malice.
Thus she began to plan Rama’s exile.
🔸 श्लोक 6.009 – Sanskrit
कैकेयि त्वं समुत्तिष्ठ रामराज्याभिषेचनं ।
मरणं तव पुत्रस्य मम ते नात्र संशयः ॥६.००९॥
🔸 श्लोक 6.009 – हिन्दी व्याख्या
कैकेयी ने कहा –
"उठो, राम के राज्याभिषेक को रोको।
तेरे पुत्र का मृत्यु निश्चित है, इसमें कोई संदेह नहीं।"
🔸 Shloka 6.009 – English Translation
Kaikeyi said –
"Rise and prevent Rama’s coronation.
The death of your son is certain, there is no doubt in this."
🔸 श्लोक 6.010 – Sanskrit
कुब्जयोक्तञ्च तच्छ्रुत्वा एकमाभरणं ददौ ।
उवाच मे यथा रामस्तथा मे भरतः सुतः ॥६.०१०॥
🔸 श्लोक 6.010 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने कुब्जा (कैकेयी की सलाह) सुनी और एक आभूषण दिया।
भरत ने कहा – "जिस प्रकार राम ने मेरे लिए कहा, मैंने वैसा ही किया।"
🔸 Shloka 6.010 – English Translation
Bharata, hearing Kubja’s (Kaikeyi’s advisor) words, gave one ornament.
Bharata said – "As Rama instructed me, I have done the same."
🔸 श्लोक 6.011 – Sanskrit
चक्रे बलिञ्च सुतलं तच्छक्राय ददौ हरिः ।
शक्रो देवैर्हरिं स्तुत्वा भुवनेशः सुखीं त्वभूत् ॥६.०११॥
🔸 श्लोक 6.011 – हिन्दी व्याख्या
भगवान् हरि ने सुतल (असुरलोक) को दैत्य राजा बलि को सौंपा और उसे शासक बनाया।
देवताओं के अधिपति इन्द्र ने हरि की स्तुति की और सब ठीक रहा।
🔸 Shloka 6.011 – English Translation
Lord Hari handed over Sutala (the demon world) to the demon king Bali and made him its ruler.
Indra, the king of gods, praised Hari, and all was well.
🔸 श्लोक 6.012 – Sanskrit
वक्ष्ये परशुरामस्य चावतारं श्रृणु द्विज ।
उद्वतान् क्षत्रियान् मत्वा भूभारहाणाय सः ॥६.०१२॥
🔸 श्लोक 6.012 – हिन्दी व्याख्या
मैं आपको परशुराम के अवतार के बारे में बताऊँगा।
उन्होंने उठकर क्षत्रियों को मारा ताकि पृथ्वी से अन्याय और अधर्म का नाश हो।
🔸 Shloka 6.012 – English Translation
I shall narrate the incarnation of Parashurama.
He rose and vanquished the Kshatriyas to eliminate evil and injustice from the Earth.
🔸 श्लोक 6.013 – Sanskrit
अवतीर्णो हरिः शान्त्यै देवविप्रादिपालकः ।
जमदग्ने रेणुकायां भार्गवः शस्त्रपारगः ॥६.०१३॥
🔸 श्लोक 6.013 – हिन्दी व्याख्या
भगवान हरि ने देवताओं और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए अवतार लिया।
जमदग्नि के वंश से जन्मे भार्गव (परशुराम) शस्त्रविद्या में निपुण थे।
🔸 Shloka 6.013 – English Translation
Lord Hari incarnated to protect the gods and Brahmins.
Born in the lineage of Jamadagni, Bhargava (Parashurama) was proficient in weaponry.
🔸 श्लोक 6.014 – Sanskrit
दत्तात्रेयप्रसादेन कार्त्तवीर्यो नृपस्त्वभूत ।
सहस्त्रबाहुः सर्वोर्वीपतिः स मृगयां गतः ॥६.०१४॥
🔸 श्लोक 6.014 – हिन्दी व्याख्या
भगवान कर्त्तवीर्य दत्तात्रेय की कृपा से शक्तिशाली और महान राजा बने।
हजारों हाथों वाला, सबके ऊपर राज करने वाला, वह वन में शिकार पर गया।
🔸 Shloka 6.014 – English Translation
By the grace of Dattatreya, Kartavirya became a mighty king.
He, with a thousand arms, lord of all, went to the forest for hunting.
🔸 श्लोक 6.015 – Sanskrit
श्रान्तो निमन्त्रितोऽरण्ये मुनिना जमदग्निना ।
कामधेनुप्रभावेण भोजितः सबलो नृपः ॥६.०१५॥
🔸 श्लोक 6.015 – हिन्दी व्याख्या
थक कर, राजा को जमदग्नि मुनि ने वन में आमंत्रित किया।
कामधेनु के प्रभाव से शक्तिशाली राजा का भोज कराया गया।
🔸 Shloka 6.015 – English Translation
Exhausted, the king was invited by sage Jamadagni to the forest.
Through the influence of Kamadhenu, the mighty king was treated to a feast.
🔸 श्लोक 6.016 – Sanskrit
अप्रार्थयत् कामधेनुं यदा स न ददौ तदा ।
हृतवानथ रामेण शिरश्छित्त्वा निपातितः ॥६.०१६॥
🔸 श्लोक 6.016 – हिन्दी व्याख्या
जब राजा ने कामधेनु को नहीं दिया, राम ने उसे छेड़ते हुए उसका सिर काट दिया।
🔸 Shloka 6.016 – English Translation
When the king refused to grant Kamadhenu, Rama struck and beheaded him.
🔸 श्लोक 6.017 – Sanskrit
युद्धे परशुना राजा धेनुः स्वाश्रममाययौ ।
कार्त्तवीर्यस्य पुत्रस्तु जमदग्निर्निपातितः ॥६.०१७॥
🔸 श्लोक 6.017 – हिन्दी व्याख्या
युद्ध में परशुराम ने राजा को हराया और उसे अपने आश्रम में ले आए।
कर्त्तवीर्य के पुत्र जमदग्नि को मार दिया गया।
🔸 Shloka 6.017 – English Translation
In battle, Parashurama defeated the king and brought him to his hermitage.
Jamadagni, the son of Kartavirya, was slain.
🔸 श्लोक 6.018 – Sanskrit
रामे वनं गते वैरादथ रामः समागतः ।
पितरं निहतं दृष्ट्वा पितृनाशाभिमर्षितः ॥६.०१८॥
🔸 श्लोक 6.018 – हिन्दी व्याख्या
राम जब वन में गए, उन्होंने अपने पिता के हत होने को देखा और अत्यंत दुःखी हुए।
🔸 Shloka 6.018 – English Translation
When Rama went to the forest, he saw his father slain and was greatly distressed.
🔸 श्लोक 6.019 – Sanskrit
त्रिः सप्तकृत्वः पृथिवीं निःक्षत्रामकरोद्विभुः ।
कुरुश्रेत्रे पञ्च कुण्डान् कृत्वा सन्तर्प्य वै पितृन् ॥६.०१९॥
🔸 श्लोक 6.019 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने पृथ्वी को तीन-सात बार क्षत्रियों से मुक्त किया और कुरुक्षेत्र में पाँच कुण्ड बनाकर अपने पितरों को तृप्त किया।
🔸 Shloka 6.019 – English Translation
He cleared the earth of Kshatriyas three or seven times, and at Kurukshetra, created five sacred ponds to appease his ancestors.
🔸 श्लोक 6.020 – Sanskrit
काश्यपाय महीं दत्त्वा महेन्द्रे पर्वते स्थितः ।
कूर्म्मस्य च वराहस्य नृसिंहस्य च वामनम् ॥६.०२०॥
🔸 श्लोक 6.020 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने भूमि को कश्यप को दी, महेन्द्र (इन्द्र) पर्वत पर स्थित हुए।
और कूर्म, वराह, नरसिंह और वामन अवतारों का प्रबंध किया।
🔸 Shloka 6.020 – English Translation
He gave the earth to Kashyapa and Indra resided on the mountain.
The incarnations of Kurma, Varaha, Narasimha, and Vamana were thus organized.
🔸 श्लोक 6.021 – Sanskrit
दत्वा दानानि विप्रेभ्यो दीनानाथेभ्य एव सः ।
मातृभिश्चैव विप्राद्यैः शोकार्तैर्निर्गतः पुरात् ॥६.०२१॥
🔸 श्लोक 6.021 – हिन्दी व्याख्या
राम ने विप्रों और जरूरतमंदों को दान दिए।
साथ ही अपनी माता और अन्य स्त्रियों की सहायता करके वह दुखित लोगों को राहत देने निकला।
🔸 Shloka 6.021 – English Translation
Rama gave gifts to Brahmins and the needy.
Along with aiding his mother and other women, he set out to relieve the sorrowful.
🔸 श्लोक 6.022 – Sanskrit
उषित्वा तमसातीरे रात्रौ पौरान् विहाय च ।
प्रभाते तमपश्यन्तोऽयोध्यां ते पुनरागताः ॥६.०२२॥
🔸 श्लोक 6.022 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने रात को अंधकार के तट पर जाकर लोगों को छोड़ दिया।
सवेरे, वे लोग फिर से अयोध्या लौट आए।
🔸 Shloka 6.022 – English Translation
At night, he left the people at the dark riverbank.
In the morning, they returned to Ayodhya.
🔸 श्लोक 6.023 – Sanskrit
रुदन् राजापि कौशल्या गृहमागात्सुदुःखितः ।
पौरा जना स्त्रियः सर्वा रुरुदू राजयोषितः ॥६.०२३॥
🔸 श्लोक 6.023 – हिन्दी व्याख्या
राजा कौशल्या बहुत दुःखी होकर घर लौटे।
सभी नगरवासी और महिलाएँ भी विलाप कर रही थीं।
🔸 Shloka 6.023 – English Translation
King Dasharatha returned home deeply sorrowful.
All the townspeople, including the women, wept bitterly.
🔸 श्लोक 6.024 – Sanskrit
रामो रथस्थश्चीराढ्यः शृङ्गवेरपुरं ययौ ।
गुहेन पूजितस्तत्र इङ्गुदीमूलमाश्रितः ॥६.०२४॥
🔸 श्लोक 6.024 – हिन्दी व्याख्या
राम रथ पर चढ़कर शृङ्गवेर नगर की ओर गए।
वे एक गुफा में जाकर इङ्गुदी के पेड़ के नीचे ठहरे और उसकी पूजा की।
🔸 Shloka 6.024 – English Translation
Rama mounted the chariot and proceeded to Shringaverapura.
He stayed in a cave beneath an Ingudi tree and performed worship there.
🔸 श्लोक 6.025 – Sanskrit
लक्ष्मणः स गुहो रात्रौ चक्रतुर्जागरं हि तौ ।
सुमन्त्रं सरथं त्यक्त्वा प्रातर्नावाथ जाह्नवीं ॥६.०२५॥
🔸 श्लोक 6.025 – हिन्दी व्याख्या
रात्रि में लक्ष्मण गुफा में जागर रखते थे।
उन्होंने सुमंत्र को छोड़कर प्रातःकाल नाव लेकर जाह्नवी (गंगा) की ओर गए।
🔸 Shloka 6.025 – English Translation
At night, Lakshmana kept vigil in the cave.
Leaving Sumanta, he took the boat in the morning and went to the Ganga (Jahnavi).
🔸 श्लोक 6.026 – Sanskrit
रामलक्ष्मणसीताश्च तीर्णा आपुः प्रयागकम् ।
भरद्वाजं नमस्कृत्य चित्रकूटं गिरिं ययुः ॥६.०२६॥
🔸 श्लोक 6.026 – हिन्दी व्याख्या
राम, लक्ष्मण और सीता प्रयाग पहुँचे।
भरद्वाज को प्रणाम करके वे चित्रकूट पर्वत की ओर चले।
🔸 Shloka 6.026 – English Translation
Rama, Lakshmana, and Sita reached Prayag.
After bowing to Bharadwaja, they proceeded to Mount Chitrakoot.
🔸 श्लोक 6.027 – Sanskrit
वास्तुपूजान्ततः कृत्वा स्थिता मन्दाकिनीतटे ।
सीतायै दर्शयामास चित्रकूटञ्च राघवः ॥६.०२७॥
🔸 श्लोक 6.027 – हिन्दी व्याख्या
राम ने वास्तु पूजा करने के बाद मन्दाकिनी के तट पर ठहरकर सीता को चित्रकूट दिखाया।
🔸 Shloka 6.027 – English Translation
After performing the worship, Rama stayed at the banks of Mandakini and showed Chitrakoot to Sita.
🔸 श्लोक 6.028 – Sanskrit
नखैर्विदारयन्तन्तां काकन्तच्चक्षुराक्षिपत् ।
ऐषिकास्त्रेण शरणं प्राप्तो देवान् विहायसः ॥६.०२८॥
🔸 श्लोक 6.028 – हिन्दी व्याख्या
उन्होंने अपनी नखों से तंतु काटे और अपनी दृष्टि से निशाना बनाया।
ऐषिका के अस्त्र से देवताओं ने शरण ली और वे सुरक्षित रहे।
🔸 Shloka 6.028 – English Translation
He pierced the threads with his nails and took aim with his eyes.
The gods sought refuge from the dart weapon and were safe.
🔸 श्लोक 6.029 – Sanskrit
रामे वनं गते राजा षष्ठेऽह्नि निशि चाब्रवीत् ।
कौशल्यां स कथां पौर्वां यदज्ञानद्धतः पुरा ॥६.०२९॥
🔸 श्लोक 6.029 – हिन्दी व्याख्या
जब राजा राम वन गए, तो छठे दिन और रात को उन्होंने कौशल्या को पुरानी घटना के बारे में बताया।
🔸 Shloka 6.029 – English Translation
When King Rama went to the forest, on the sixth day and night, he narrated the earlier incident to Kaushalya.
🔸 श्लोक 6.030 – Sanskrit
उषित्वा तमसातीरे रात्रौ पौरान् विहाय च ।
प्रभाते तमपश्यन्तोऽयोध्यां ते पुनरागताः ॥६.०३०॥
🔸 श्लोक 6.030 – हिन्दी व्याख्या
रात्रि के समय उन्होंने तमसातीर छोड़कर नगर को छोड़ा।
सबे लोग सुबह अयोध्या लौट आए और वहाँ देखी गई स्थिति को जाना।
🔸 Shloka 6.030 – English Translation
At night, they left Tamasati Shore and the townspeople went away.
In the morning, they returned to Ayodhya and saw the situation there.
🔸 श्लोक 6.031 – Sanskrit
रुदन् राजापि कौशल्या गृहमागात्सुदुःखितः ।
पौरा जना स्त्रियः सर्वा रुरुदू राजयोषितः ॥६.०३१॥
🔸 श्लोक 6.031 – हिन्दी व्याख्या
राजा कौशल्या भी अत्यंत दुखी होकर रोते हुए घर लौटे।
सभी नगरवासी, विशेषकर महिलाएँ, भी दुखी होकर रो रही थीं।
🔸 Shloka 6.031 – English Translation
King, along with Kaushalya, returned home weeping in deep sorrow.
All the townspeople, especially women, were crying in grief.
🔸 श्लोक 6.032 – Sanskrit
रामो रथस्थश्चीराढ्यः शृङ्गवेरपुरं ययौ ।
गुहेन पूजितस्तत्र इङ्गुदीमूलमाश्रितः ॥६.०३२॥
🔸 श्लोक 6.032 – हिन्दी व्याख्या
राम रथ पर बैठे और शृंगवेरपुर की ओर बढ़े।
वह गुफा में जाकर पूजित हुए और इंगुदी मूल में विश्राम किए।
🔸 Shloka 6.032 – English Translation
Rama, seated on the chariot, proceeded towards Shringaverapura.
There he worshipped the sacred cave and took rest at the Ingudi tree.
🔸 श्लोक 6.033 – Sanskrit
लक्ष्मणः स गुहो रात्रौ चक्रतुर्जागरं हि तौ ।
सुमन्त्रं सरथं त्यक्त्वा प्रातर्नावाथ जाह्नवीं ॥६.०३३॥
🔸 श्लोक 6.033 – हिन्दी व्याख्या
लक्ष्मण गुफा में रात भर जागर किए।
उन्होंने सुमन्त्र का रथ छोड़ दिया और प्रातःकाल नाव से जह्नवी पार की।
🔸 Shloka 6.033 – English Translation
Lakshmana stayed awake in the cave all night.
He left Sumanta’s chariot and crossed the Yamuna River by boat in the morning.
🔸 श्लोक 6.034 – Sanskrit
रामलक्ष्मणसीताश्च तीर्णा आपुः प्रयागकम् ।
भरद्वाजं नमस्कृत्य चित्रकूटं गिरिं ययुः ॥६.०३४॥
🔸 श्लोक 6.034 – हिन्दी व्याख्या
राम, लक्ष्मण और सीता प्रयाग पहुँचे।
उन्होंने भरद्वाज को प्रणाम किया और फिर चित्रकूट पर्वत की ओर चले।
🔸 Shloka 6.034 – English Translation
Rama, Lakshmana, and Sita arrived at Prayag.
They bowed to Bharadwaja and then proceeded towards the Chitrakoot mountain.
🔸 श्लोक 6.035 – Sanskrit
वास्तुपूजान्ततः कृत्वा स्थिता मन्दाकिनीतटे ।
सीतायै दर्शयामास चित्रकूटञ्च राघवः ॥६.०३५॥
🔸 श्लोक 6.035 – हिन्दी व्याख्या
चित्रकूट पर्वत के तट पर पहुँचकर राम ने मंदिर की पूजा की।
उसने सीता को वहाँ का दृश्य दिखाया।
🔸 Shloka 6.035 – English Translation
Arriving at the banks of Chitrakoot, Rama performed the temple worship.
He showed Sita the surroundings of Chitrakoot.
🔸 श्लोक 6.036 – Sanskrit
नखैर्विदारयन्तन्तां काकन्तच्चक्षुराक्षिपत् ।
ऐषिकास्त्रेण शरणं प्राप्तो देवान् विहायसः ॥६.०३६॥
🔸 श्लोक 6.036 – हिन्दी व्याख्या
राम ने अपनी नाखूनों से और दृष्टि से शत्रु को मारा।
ऐषिका (तीर) के माध्यम से शरण पाकर देवों को छोड़ दिया।
🔸 Shloka 6.036 – English Translation
Rama struck down enemies with his nails and gaze.
Through the use of arrows, the devout took refuge, sparing the gods.
🔸 श्लोक 6.037 – Sanskrit
रामे वनं गते राजा षष्ठेऽह्नि निशि चाब्रवीत् ।
कौशल्यां स कथां पौर्वां यदज्ञानद्धतः पुरा ॥६.०३७॥
🔸 श्लोक 6.037 – हिन्दी व्याख्या
राजा राम जब जंगल में पहुँचा, छठे दिन और रात को कौशल्या को पूर्व में हुई घटना का वर्णन सुनाया।
🔸 Shloka 6.037 – English Translation
When King Rama reached the forest, on the sixth day and night, he narrated to Kaushalya the events that had occurred previously.
🔸 श्लोक 6.038 – Sanskrit
कौमारे शरयूतीरे यज्ञदत्तकुमारकः ।
शब्दभेदाच्च कुम्भेन शब्दं कुर्वंश्च तत्पिता ॥६.०३८॥
🔸 श्लोक 6.038 – हिन्दी व्याख्या
कौमारे नदी के किनारे यज्ञदत्तकुमारक (शरयूतीर के पास)
शब्द भेद द्वारा कुम्भ की मदद से श्रव्य संकेत कर रहा था।
🔸 Shloka 6.038 – English Translation
At the bank of the Kaumara River, Yajnadattakumaraka, using sound differentiation and a pot, communicated messages.
🔸 श्लोक 6.039 – Sanskrit
शशाप विलपन्मात्रा शोकं कृत्वा रुदन्मुहुः ।
पुत्रं विना मरिष्यावस्त्वं च शोकान्मरिष्यसि ॥६.०३९॥
🔸 श्लोक 6.039 – हिन्दी व्याख्या
माँ शशा केवल विलाप कर रही थी और बार-बार रो रही।
उसने कहा कि पुत्र के बिना मैं मर जाऊँगी और शोक के कारण मर जाऊँगी।
🔸 Shloka 6.039 – English Translation
Mother Shasha was crying incessantly and lamenting.
She said that without her son, she would die, overwhelmed by grief.
🔸 श्लोक 6.040 – Sanskrit
पुत्रं विना स्मरन् शोकात्कौशल्ये मरणं मम ।
कथामुक्त्वाथ हा राममुक्त्वा राजा दिवङ्गतः ॥६.०४०॥
🔸 श्लोक 6.040 – हिन्दी व्याख्या
कौशल्या पुत्र की याद में दुखी होकर कहती है कि उसके बिना मेरा जीवन व्यर्थ है।
इस प्रकार कहने के बाद राजा (दशरथ) स्वर्गलोक को चला गया।
🔸 Shloka 6.040 – English Translation
Kaushalya, remembering her son, expressed her grief, saying that life is meaningless without him.
After speaking thus, the king (Dasharatha) departed to the heavenly realm.
🔸 श्लोक 6.041 – Sanskrit
सुप्तं मत्त्वाथ कौशल्या सुप्ता शोकार्तमेव सा ।
सुप्रभाते गायनाश्च सूतमागधवन्दिनः ॥६.०४१॥
🔸 श्लोक 6.041 – हिन्दी व्याख्या
कौशल्या दुख और शोक में सोई रही।
सुबह होते ही, वे (सूता और अन्य लोग) उनका सम्मान करने पहुंचे।
🔸 Shloka 6.041 – English Translation
Kaushalya remained asleep in grief and sorrow.
At dawn, the devotees and the messenger arrived to pay their respects.
🔸 श्लोक 6.042 – Sanskrit
प्रबोधका बोधयन्ति न च बुध्यत्यसौ मृतः ।
कौशल्या तं मृतं ज्ञात्वा हा हतास्मीति चाब्रवीत् ॥६.०४२॥
🔸 श्लोक 6.042 – हिन्दी व्याख्या
जो लोग उन्हें जगा रहे थे, वे समझ नहीं पा रहे थे कि राजा मृत है।
कौशल्या राजा को मृत जानकर रोते हुए बोली – “हाय! मैं विधवा हो गई।”
🔸 Shloka 6.042 – English Translation
Those who were trying to awaken him could not realize that the king had passed away.
Kaushalya, seeing him dead, lamented, saying, “Alas! I am now a widow.”
🔸 श्लोक 6.043 – Sanskrit
नरा नार्योऽथ रुरुदुरानीतो भरतस्तदा ।
वशिष्ठाद्यैः सशत्रुघ्नः शीघ्रं राजगृहात्पुरीम् ॥६.०४३॥
🔸 श्लोक 6.043 – हिन्दी व्याख्या
तभी भरत और अन्य लोग दुखी होकर रोए।
वशिष्ठ और अन्य द्रष्टा/सल्लाहकारों ने शीघ्रता से राजमहल की ओर गए।
🔸 Shloka 6.043 – English Translation
At that moment, Bharat and the others wept in sorrow.
Vashistha and the other sages promptly proceeded to the royal palace.
🔸 श्लोक 6.044 – Sanskrit
दृष्ट्वा सशोकां कैकेयीं निन्दयामास दुःखितः ।
अकीर्तिः पातिता मूर्ध्नि कौशल्यां स प्रशस्य च ॥६.०४४॥
🔸 श्लोक 6.044 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने कैकेयी को दुखी देखकर उसकी निंदा की।
साथ ही उसने कौशल्या की सराहना भी की, क्योंकि वह दुःख में थीं।
🔸 Shloka 6.044 – English Translation
Seeing Kaikeyi distressed, Bharat reproached her.
He also praised Kaushalya, who was overwhelmed with grief.
🔸 श्लोक 6.045 – Sanskrit
पितरन्तैलद्रोणिस्थं संस्कृत्य सरयूतटे ।
वशिष्ठाद्यैर्जनैरुक्तो राज्यं कुर्विति सोऽब्रवीत् ॥६.०४५॥
🔸 श्लोक 6.045 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने सरयू के किनारे, अपने पिता (दशरथ) की राख को तेलद्रोण में रखकर संस्कार किया।
वशिष्ठ और अन्य लोगों ने उसे राज्य का संचालन करने के लिए कहा और उसने ऐसा किया।
🔸 Shloka 6.045 – English Translation
Bharat performed the last rites of his father (Dasharatha) by placing the ashes in an oil-pot at the banks of the Sarayu River.
Vashistha and the other elders instructed him to administer the kingdom, which he did.
🔸 श्लोक 6.046 – Sanskrit
व्रजामि राममानेतुं रामो राजा मतो बली ।
शृङ्गवेरं प्रयागञ्च भरद्वाजेन भोजितः ॥६.०४६॥
🔸 श्लोक 6.046 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने कहा, “मैं राम के पास जाकर उन्हें अपने राज्य की बात सुनाऊँ।”
राम, शृंगवेर और प्रयाग में, भरद्वाज के सानिध्य में भोजन कर रहे थे।
🔸 Shloka 6.046 – English Translation
Bharat said, “I shall go to Rama to bring him back.”
Rama was at Shringaver, and at Prayag, he partook of a meal in the presence of sage Bharadwaja.
🔸 श्लोक 6.047 – Sanskrit
नमस्कृत्य भरद्वाजं रामं लक्ष्मणमागतः ।
पिता स्वर्गं गतो राम अयोध्यायां नृपो भव ॥६.०४७॥
🔸 श्लोक 6.047 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने राम और लक्ष्मण के सम्मुख ऋषि भरद्वाज को प्रणाम किया।
उसने कहा कि उनके पिता (दशरथ) स्वर्गलोक को चले गए और अब वह अयोध्या का राजा बनेंगे।
🔸 Shloka 6.047 – English Translation
Bharat, in front of Rama and Lakshmana, paid respects to sage Bharadwaja.
He stated that their father (Dasharatha) has departed to heaven, and he would now rule Ayodhya.
🔸 श्लोक 6.048 – Sanskrit
अहं वनं प्रयास्यामि त्वदादेशप्रतीक्षकः ।
रामः श्रुत्वा जलं दत्वा गृहीत्वा पादुके व्रज ॥६.०४८॥
🔸 श्लोक 6.048 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने कहा कि वह राम के आदेश का पालन करते हुए वन जाएगा।
राम ने यह सुनकर जल लिया और अपने पादुके लेकर आ गए।
🔸 Shloka 6.048 – English Translation
Bharat said he would go to the forest as per Rama’s command.
Hearing this, Rama took water and brought the sandals with him.
🔸 श्लोक 6.049 – Sanskrit
राज्यायाहन्नयास्यामि(११) सत्याच्चीरजटाधरः ।
रामोक्तो भरतश्चायान्नन्दिग्रामे स्थितो बली ॥६.०४९॥
🔸 श्लोक 6.049 – हिन्दी व्याख्या
भरत ने कहा कि वह राज्य की देखभाल करेगा।
राम ने यह सुनकर अपनी आज्ञा दी और वह नंदीग्राम में निवास करने लगे।
🔸 Shloka 6.049 – English Translation
Bharat stated that he would oversee the kingdom.
Rama consented, and he stayed at Nandigram.

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