वेदान्त दर्शन : ब्रह्म, आत्मा और मोक्ष का परम दार्शनिक विवेचन (Vedānta Darśana)
प्रस्तावना : वेदान्त दर्शन का स्थान भारतीय दर्शन में
वेदान्त दर्शन भारतीय दर्शन की पराकाष्ठा (Culmination) माना जाता है। जहाँ अन्य दर्शन तर्क, पदार्थ या साधना की चर्चा करते हैं, वहीं वेदान्त सीधे परम सत्य (ब्रह्म) का बोध कराता है। वेदान्त का अर्थ है—वेदों का अन्त, अर्थात् वेदों का अंतिम और सर्वोच्च दार्शनिक निष्कर्ष।
वेदान्त दर्शन का मूल आधार उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और भगवद्गीता हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से प्रस्थानत्रयी कहा जाता है। वेदान्त दर्शन का केन्द्रीय प्रश्न है—मैं कौन हूँ? यह जगत क्या है? और मोक्ष क्या है?
वेदान्त दर्शन की वैदिक एवं उपनिषदिक पृष्ठभूमि
वेदों के कर्मकाण्ड और उपासनाकाण्ड के पश्चात् उपनिषदों में जिस गूढ़ ज्ञान का उदय होता है, वही वेदान्त है। उपनिषद बार-बार उद्घोष करते हैं कि आत्मा और ब्रह्म एक ही सत्य हैं।
अहं ब्रह्मास्मि — बृहदारण्यक उपनिषद
तत्त्वमसि — छान्दोग्य उपनिषद
सर्वं खल्विदं ब्रह्म — छान्दोग्य उपनिषद
वेदान्त दर्शन का उद्देश्य
वेदान्त का उद्देश्य है:
- अविद्या (अज्ञान) का नाश
- आत्मा और ब्रह्म की एकता का बोध
- जन्म–मरण के चक्र से मुक्ति
- जीवन्मुक्ति की प्राप्ति
वेदान्त के अनुसार अज्ञान ही बन्धन है और ज्ञान ही मोक्ष।
ब्रह्म की अवधारणा
वेदान्त में ब्रह्म को:
- सत्य (परम वास्तविक)
- ज्ञान (चैतन्य स्वरूप)
- अनन्त (देश–काल से परे)
कहा गया है।
सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म — तैत्तिरीय उपनिषद
ब्रह्म निर्गुण भी है और सगुण भी—यह वेदान्त की विशेषता है।
आत्मा का स्वरूप
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है। आत्मा शरीर, इन्द्रिय और मन से भिन्न है।
न जायते म्रियते वा कदाचित् — गीता
वेदान्त के अनुसार जीवात्मा और परमात्मा भिन्न नहीं हैं, भेद केवल अज्ञानजन्य है।
माया सिद्धांत
वेदान्त दर्शन में माया वह शक्ति है जो एक को अनेक के रूप में प्रकट करती है।
- माया न पूर्ण सत्य है
- न पूर्ण असत्य
इसी कारण जगत प्रतीत होता है।
मोक्ष की अवधारणा
वेदान्त में मोक्ष का अर्थ है:
- ब्रह्मस्वरूप की अनुभूति
- जीवन्मुक्ति
- भय, दुःख और अज्ञान का पूर्ण नाश
मोक्ष कोई स्थान नहीं, बल्कि चेतना की अवस्था है।
वेदान्त के प्रमुख सम्प्रदाय
वेदान्त दर्शन के तीन प्रमुख दर्शनात्मक रूप हैं:
1. अद्वैत वेदान्त (शंकराचार्य)
- ब्रह्म एकमात्र सत्य
- जगत मिथ्या
- जीव और ब्रह्म अभिन्न
2. विशिष्टाद्वैत वेदान्त (रामानुजाचार्य)
- ब्रह्म सगुण
- जीव और जगत ब्रह्म के अंग
- भक्ति द्वारा मोक्ष
3. द्वैत वेदान्त (माध्वाचार्य)
- जीव और ब्रह्म भिन्न
- ईश्वर सर्वोच्च
- भक्ति और कृपा से मोक्ष
वेदान्त और अन्य दर्शन
| दर्शन | दृष्टि |
|---|---|
| सांख्य | द्वैत (प्रकृति–पुरुष) |
| योग | साधना प्रधान |
| न्याय–वैशेषिक | तर्क और पदार्थ |
| वेदान्त | ब्रह्मज्ञान |
वेदान्त और आधुनिक विज्ञान
- चेतना का प्रश्न
- ऊर्जा और एकत्व
- ब्रह्माण्ड की एकात्मकता
आधुनिक क्वांटम भौतिकी में वेदान्त से साम्य दिखाई देता है।
आधुनिक जीवन में वेदान्त दर्शन की प्रासंगिकता
- आत्मिक शान्ति
- भय और तनाव से मुक्ति
- नैतिक जीवन
- वैश्विक एकता का बोध
FAQ : वेदान्त दर्शन
Q. क्या वेदान्त केवल संन्यासियों के लिए है?
नहीं, यह गृहस्थों के लिए भी उतना ही उपयोगी है।
Q. क्या वेदान्त धर्म है या दर्शन?
वेदान्त दर्शन है, पर जीवन-पद्धति भी है।
निष्कर्ष : वेदान्त का शाश्वत संदेश
वेदान्त दर्शन मानव को सीमित देह-बुद्धि से उठाकर ब्रह्मचेतना तक पहुँचाता है। यह दर्शन सिखाता है कि सत्य बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर है।
वेदान्त न केवल भारतीय दर्शन की आत्मा है, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए शान्ति और मुक्ति का सार्वकालिक मार्ग है।

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