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योग दर्शन क्या है? अष्टांग योग, समाधि और आत्मसाक्षात्कार का सम्पूर्ण ज्ञान



योग दर्शन : चित्तवृत्ति निरोध और आत्मसाक्षात्कार का वैज्ञानिक दर्शन (Yoga Darśana)


प्रस्तावना : योग दर्शन का वैश्विक महत्व

योग दर्शन भारतीय दर्शन की वह अद्वितीय प्रणाली है जिसने आध्यात्मिक साधना को वैज्ञानिक अनुशासन प्रदान किया। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा की पूर्ण शुद्धि का मार्ग

महर्षि पतंजलि द्वारा प्रणीत योगसूत्र योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। आज सम्पूर्ण विश्व में योग को मानसिक शान्ति, स्वास्थ्य और आत्मविकास के लिए अपनाया जा रहा है।


योग दर्शन की वैदिक पृष्ठभूमि

योग का उल्लेख ऋग्वेद, उपनिषदों और भगवद्गीता में मिलता है।

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः — योगसूत्र 1.2

उपनिषदों में योग को आत्मा और ब्रह्म के साक्षात्कार का साधन बताया गया है।


योग दर्शन का उद्देश्य

योग दर्शन का लक्ष्य है:

  • चित्त की चंचलता का निरोध
  • दुःखों के मूल कारणों का नाश
  • विवेकख्याति की प्राप्ति
  • कैवल्य (मोक्ष)

योग के अनुसार दुःख का कारण अज्ञान है और योग उसका समाधान


चित्त और चित्तवृत्तियाँ

योग दर्शन में चित्त तीन तत्वों से बनता है:

  • मन
  • बुद्धि
  • अहंकार

चित्त की पाँच वृत्तियाँ हैं:

  1. प्रमाण
  2. विपर्यय
  3. विकल्प
  4. निद्रा
  5. स्मृति

इनका निरोध ही योग है।


क्लेश सिद्धांत

पतंजलि ने दुःख के पाँच मूल कारण बताए:

  1. अविद्या
  2. अस्मिता
  3. राग
  4. द्वेष
  5. अभिनिवेश

योग साधना से इन क्लेशों का क्षय होता है।


अष्टांग योग : साधना का पूर्ण मार्ग

पतंजलि का योग अष्टांग योग के रूप में प्रसिद्ध है:

1. यम (सामाजिक अनुशासन)

  • अहिंसा
  • सत्य
  • अस्तेय
  • ब्रह्मचर्य
  • अपरिग्रह

2. नियम (व्यक्तिगत अनुशासन)

  • शौच
  • संतोष
  • तप
  • स्वाध्याय
  • ईश्वरप्रणिधान

3. आसन

शरीर की स्थिरता और स्वास्थ्य

4. प्राणायाम

प्राणशक्ति का नियमन

5. प्रत्याहार

इन्द्रियों का संयम

6. धारणा

चित्त को एक बिन्दु पर स्थिर करना

7. ध्यान

निरन्तर चेतना प्रवाह

8. समाधि

साध्य और साधक का एकत्व


समाधि के प्रकार

  • संप्रज्ञात समाधि
  • असंप्रज्ञात समाधि

समाधि में चित्त पूर्णतः शुद्ध हो जाता है।


योग दर्शन और सांख्य दर्शन

योग दर्शन सांख्य के तत्त्वज्ञान को स्वीकार करता है, परन्तु:

  • योग ईश्वर को मानता है
  • सांख्य ईश्वरनिरपेक्ष है

दोनों का लक्ष्य कैवल्य है।

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योग और ईश्वर की अवधारणा

योग दर्शन में ईश्वर:

  • क्लेशों से परे
  • कर्मफल से मुक्त
  • आदिगुरु

ईश्वरप्रणिधान से समाधि सुलभ होती है।


योग और आधुनिक विज्ञान

  • न्यूरोसाइंस और ध्यान
  • योग व मानसिक स्वास्थ्य
  • श्वसन विज्ञान और प्राणायाम

आज योग को वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त है।


आधुनिक जीवन में योग दर्शन की उपयोगिता

  • तनाव प्रबंधन
  • आत्मसंयम
  • सकारात्मक सोच
  • नैतिक जीवन

FAQ : योग दर्शन

Q. क्या योग केवल शारीरिक अभ्यास है?
नहीं, योग सम्पूर्ण जीवन-दर्शन है।

Q. क्या गृहस्थ योग कर सकता है?
हाँ, योग सभी के लिए है।

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निष्कर्ष : योग दर्शन का शाश्वत संदेश

योग दर्शन मानव को चित्त की अस्थिरता से मुक्त कर आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाता है। यह दर्शन बताता है कि सच्ची शान्ति बाहरी संसार में नहीं, बल्कि अन्तःकरण की शुद्धि

योग केवल साधना नहीं, बल्कि जीवन को दिव्य बनाने की कला है।



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