Tantrsar Chapter 13 hindi english Expectations

संस्कृत श्लोक व्याख्या

संस्कृत श्लोक और व्याख्या

अथ प्रसन्नहृदयो यागस्थानं यायात् तच् च यत्रैव हृदयं प्रसादयुक्तं परमेश्वरसमावेशयोग्यं भवति तद् एव न तु अस्य अन्यल् लक्षणम् उक्ताव् अपि ध्येयतादात्म्यम् एव कारणम् तद् अपि भावप्रसादाद् एव इति नान्यत् स्थानम् ॥ १३.१

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

अथ: अब, ततः
प्रसन्नहृदयो: प्रसन्न हृदय वाला
यागस्थानं: यज्ञ स्थल
यायात्: जाए
तत् च यत्रैव ... वह जगह जहाँ हृदय प्रसन्न और परमेश्वर के लिए योग्य होता है

हिंदी अर्थ: अब जो हृदय प्रसन्न है वह यज्ञस्थल को जाए। हृदय की प्रसन्नता और परमेश्वर की अनुभूति योग्य होने से ही स्थान का महत्व है, न कि अन्य लक्षण।

English Meaning: Now, a person with a joyful heart should go to the sacrificial place. The importance lies in the heart being serene and suitable for communion with God, not in other external signs.

पीठपर्वताग्रम् इत्यादिस् तु शास्त्रे स्थानोद्देश एतत्पर एव बोद्धव्यः ॥ १३.२

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

पीठपर्वताग्रम्: पीठ या पर्वत की चोटी
इत्यादि: आदि
तु: लेकिन
शास्त्रे: शास्त्र में
स्थानोद्देश: स्थान का उद्देश्य
एतत् पर एव बोद्धव्यः: इसे विशेष रूप से जाना जाना चाहिए

हिंदी अर्थ: शास्त्र में पीठ या पर्वत आदि का स्थान विशेष उद्देश्य के लिए बताया गया है।

English Meaning: Scriptures indicate specific locations such as peaks or seats for special purposes.

तेषु तेषु पीठादिस्थानेषु परमेशनियत्या परमेश्वराविष्टानां शक्तीनां देहग्रहणात् आर्यदेशा इव धार्मिकाणां म्लेच्छदेशा इव अधार्मिकाणाम् पर्वताग्रादेश् चैकान्तत्वेन विक्षेपपरिहारात् ऐकाग्र्यपदत्वम् इति ॥ १३.३

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

तेषु तेषु: उन-उन जगहों पर
पीठादि: पीठ आदि स्थानों में
परमेशनियता: परमेश्वर की उपस्थिति
आर्यदेशा इव: धार्मिक स्थान की तरह
म्लेच्छदेशा इव: अधार्मिक स्थान की तरह
ऐकाग्र्यपदत्वम्: एकाग्रता का पद

हिंदी अर्थ: इन पीठादि स्थानों पर परमेश्वर की शक्तियों का निवास होता है। धार्मिक स्थानों में वैसा ही अनुभव होता है, अधार्मिक में नहीं। यहाँ एकाग्रता और विक्षेप रहित ध्यान की आवश्यकता है।

English Meaning: In such seats or peaks, divine energies reside. They resemble sacred places for the virtuous and non-sacred for the non-virtuous. Concentration without distraction is essential here.

तत्र यागगृहाग्रे बहिर् एव सामान्यन्यासं कुर्यात् करयोः पूर्वं ततो देहे ॥ १३.४

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

तत्र: वहाँ
यागगृहाग्रे: यज्ञ गृह के अग्र भाग में
बहिर् एव: बाहर ही
सामान्यन्यासं कुर्यात्: सामान्य प्रारंभिक नियुक्ति करे
करयोः पूर्वं ततो देहे: पहले हाथों में, फिर शरीर में

हिंदी अर्थ: यज्ञ गृह के सामने बाहरी क्षेत्र में सामान्य नियोजन करें, पहले हाथों में और फिर शरीर में।

English Meaning: In front of the sacrificial hall, perform the standard preliminary placements, first in the hands and then in the body.

ह्रीं न फ ह्रीं ह्रीं आ क्ष ह्रीं इत्य् आभ्यां शक्तिशक्तिमद्वाचकाभ्यां मालिनीशब्दराशिमन्त्राभ्याम् एकेनैव आदौ शक्तिः ततः शक्तिमान् इति मुक्तौ पादाग्राच् छिरोऽन्तम् भुक्तौ तु सर्वो विपर्ययः ॥ १३.५

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

ह्रीं: शक्ति का बीज मंत्र
आक्ष: ध्यान केंद्रित करने वाला
मालिनीशब्दराशि मंत्राभ्याम्: मंत्रों की श्रृंखला
एकेनैव आदौ: शुरुआत में एक ही मंत्र
शक्तिः ततः शक्तिमान्: शक्ति उत्पन्न होती है और फिर शक्तिशाली बनता है

हिंदी अर्थ: प्रारंभ में एक ही मंत्र से शक्ति उत्पन्न होती है। इस शक्ति से पूर्ण रूप से अनुभव प्राप्त होता है; यदि विपरीत किया जाए तो भ्रम होता है।

English Meaning: Initially, power is generated through a single mantra. This leads to full realization; reversing the procedure causes confusion.

मालिनी हि भगवती मुख्यम् शाक्तं रूपं बीजयोनिसंघट्टेन समस्तकामदुघम् ॥ १३.६

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

मालिनी: देवी का नाम
हि: निश्चय ही
भगवती: परम देवी
मुख्यम् शाक्तं रूपं: मुख्य शक्तिशाली रूप
बीजयोनिसंघट्टेन: बीज और योनि के मिलन से
समस्तकामदुघम्: सभी कामों की कामना देने वाली

हिंदी अर्थ: मालिनी देवी मुख्य शक्तिशाली रूप हैं, जिनका बीज-योनि संयोग समस्त कामनाओं की पूर्ति करता है।

English Meaning: Goddess Malini is the principal Shakti form, whose seed-yonic union fulfills all desires.

अन्वर्थं चैतन् नाम रुद्रशक्तिमालाभिर् युक्ता फलेषु पुष्पिता संसारशिशिरसंहारनादभ्रमरी सिद्धिमोक्षधारिणी दानादानशक्तियुक्ता इति रलयोर् एकत्वस्मृतेः ॥ १३.७

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

अन्वर्थं चैतन् नाम: इस अर्थ में कहा गया है
रुद्रशक्तिमालाभिः युक्ता: रुद्र शक्ति-माला से युक्त
फलेषु पुष्पिता: फलों में विकसित
संसारशिशिरसंहारनादभ्रमरी: संसार के शिशिर (सर्दी) का संहार करने वाली
सिद्धिमोक्षधारिणी: सिद्धि और मोक्ष देने वाली
दानादानशक्तियुक्ता: दान और अदान की शक्ति से युक्त
रलयोर् एकत्वस्मृतेः: सभी का एकत्व स्मरण कराने वाली

हिंदी अर्थ: रुद्र शक्ति-माला से युक्त मालिनी देवी फल देती हैं, संसार के कष्टों का नाश करती हैं, सिद्धि और मोक्ष प्रदान करती हैं, दान और अदान की शक्ति रखती हैं और सभी जीवों में एकत्व की अनुभूति कराती हैं।

English Meaning: Goddess Malini, united with Rudra Shakti-mala, bears fruits, destroys worldly sufferings, grants siddhi and moksha, has the power of giving and taking, and inspires unity among beings.

अत एव हि भ्रष्टविधिर् अपि मन्त्र एतन्न्यासात् पूर्णो भवति साञ्जनोऽपि गारुडवैष्णवादिर् निरञ्जनताम् एत्य मोक्षप्रदो भवति ॥ १३.८

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

अत एव: अतः निश्चित रूप से
भ्रष्टविधि: गलत या उल्टा विधान
अपि मन्त्र एतन्न्यासात्: मंत्र स्थापना से भी
पूर्णो भवति: पूर्ण बन जाता है
साञ्जनोऽपि: सामान्य व्यक्ति भी
गारुडवैष्णवादिः: गारुड़, वैष्णव आदि (विभिन्न सम्प्रदाय)
निर्ञ्जनताम् एत्य मोक्षप्रदो: शुद्धता प्राप्त कर मोक्ष देने वाला

हिंदी अर्थ: अतः गलत विधान होने पर भी, मंत्र की स्थापना से प्रक्रिया पूर्ण होती है। सामान्य व्यक्ति भी इसे कर मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

English Meaning: Therefore, even if the procedure is imperfect, the mantra installation completes the process; even an ordinary person can attain liberation through it.

देहन्यासानन्तरम् अर्घपात्रे अयम् एव न्यासः ॥ १३.९

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

देहन्यासानन्तरम्: शरीर में स्थापना के बाद
अर्घपात्रे: अर्घ पात्र में
अयम् एव न्यासः: यही स्थापना है

हिंदी अर्थ: शरीर में स्थापना के बाद, अर्घ पात्र में यही स्थापना करनी चाहिए।

English Meaning: After the body installation, the placement should be done in the Argha vessel.

इह हि क्रियाकारकाणां परमेश्वराभेदप्रतिपत्तिदार्ढ्यसिद्धये पूजाक्रिया उदाहरणीकृता तत्र च सर्वकारकाणाम् इत्थं परमेश्वरीभावः तत्र यष्ट्राधारस्य स्थानशुद्ध्यापादानकरणयोर् अर्घपात्रशुद्धिन्यासाभ्याम् यष्टुर् देहन्यासात् याज्यस्य स्थण्डिलादिन्यासात् ॥ १३.१०

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

इह हि: यहाँ ही
क्रियाकारकाणां: क्रियाओं के करणों के लिए
परमेश्वराभेदप्रतिपत्तिदार्ढ्यसिद्धये: परमेश्वर के अभेद को समझने की सिद्धि के लिए
पूजाक्रिया उदाहरणीकृता: पूजाक्रिया का उदाहरण प्रस्तुत किया गया
सर्वकारकाणाम्: सभी करणों के लिए
अर्घपात्रशुद्धिन्यासाभ्याम्: अर्घ पात्र की शुद्धि और स्थापना से
यष्टुर् देहन्यासात् याज्यस्य स्थण्डिलादिन्यासात्: यष्टु, देह और याज्य का क्रमिक स्थापना

हिंदी अर्थ: यहाँ क्रियाओं के सभी करणों के लिए परमेश्वरी भाव दिखाते हुए पूजाक्रिया का उदाहरण दिया गया है। अर्घ पात्र की शुद्धि और स्थापना, यष्टु की स्थापना, देह स्थापना और याज्य स्थण्डिल आदि की स्थापना क्रमिक रूप से करनी चाहिए।

English Meaning: Here, for all actions, the worship procedure demonstrates the Supreme Goddess's essence. Purification and placement of the Argha vessel, Yashtru, body, and Yajya stand should be done in sequence.

एवं क्रियाक्रमेणापि परमेश्वरीकृतसमस्तकारकः तयैव दृशा सर्वक्रियाः पश्यन् विनापि प्रमुखज्ञानयोगाभ्यां परमेश्वर एव भवति ॥ १३.११

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

एवं क्रियाक्रमेणापि: इस प्रकार क्रमबद्ध क्रियाओं से भी
परमेश्वरीकृतसमस्तकारकः: समस्त क्रियाएँ परमेश्वरीकृत हो जाती हैं
तयैव दृशा: उसके द्वारा देखा गया
सर्वक्रियाः पश्यन्: सभी क्रियाओं का अनुभव करते हुए
विनापि प्रमुखज्ञानयोगाभ्यां: विशेष ज्ञान योग के बिना भी
परमेश्वर एव भवति: केवल परमेश्वर ही होता है

हिंदी अर्थ: इस प्रकार क्रमबद्ध क्रियाओं के माध्यम से, सभी क्रियाएँ परमेश्वरीकृत हो जाती हैं और सभी क्रियाओं का अनुभव केवल परमेश्वर के रूप में ही होता है, बिना किसी विशेष ज्ञान योग के।

English Meaning: In this sequential procedure, all actions become unified with the Supreme Goddess, and all activities are ultimately perceived as the Supreme, even without special knowledge-yoga.

एवम् अर्घपात्रे न्यस्य पुष्पधूपाद्यैः पूजयित्वा तद्विप्रुड्भिर् यागसारं पुष्पादि च प्रोक्षयेत् ॥ १३.१२

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

एवम्: इस प्रकार
अर्घपात्रे न्यस्य: अर्घ पात्र में स्थापित कर
पुष्पधूपाद्यैः पूजयित्वा: फूल, धूप आदि से पूजित कर
तद्विप्रुड्भिर्: योग्य ब्राह्मणों द्वारा
यागसारं पुष्पादि च प्रोक्षयेत्: यज्ञ का सार और पुष्प आदि उड़े हुए अर्पित करें

हिंदी अर्थ: अर्घ पात्र में स्थापना करके, फूल-धूप आदि से पूजित कर, योग्य ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ का सार और पुष्प आदि अर्पित करें।

English Meaning: Place in the Argha vessel, worship with flowers, incense, etc., and offer the essence of the yajna along with flowers through the qualified priests.

ततः प्रभामण्डले भूमौ खे वा ओं बाह्यपरिवाराय नम इति पूजयेत् ॥ १३.१३

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

ततः प्रभामण्डले: ततः प्रभामंडल (दीप/प्रकाश) में
भूमौ खे वा: भूमि या आकाश में
ओं बाह्यपरिवाराय नम इति पूजयेत्: "ॐ बाह्यपरिवाराय नमः" कहकर पूजित करें

हिंदी अर्थ: ततः प्रभामंडल में, भूमि या आकाश में, "ॐ बाह्यपरिवाराय नमः" कहकर पूजाएं।

English Meaning: Then, in the Prabha-mandala, on earth or in the sky, worship saying "Om Bahyaparivaraya Namah".

ततो द्वारस्थाने ओं द्वारदेवताचक्राय नम इति पूजयेत् ॥ १३.१४

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

ततो द्वारस्थाने: ततः द्वार में
ओं द्वारदेवताचक्राय नम इति पूजयेत्: "ॐ द्वारदेवताचक्राय नमः" कहकर पूजित करें

हिंदी अर्थ: ततः द्वार पर जाकर "ॐ द्वारदेवताचक्राय नमः" कहकर पूजाएं।

English Meaning: Then at the door, worship saying "Om Dwaradevatachakraya Namah".

अगुप्ते तु बहिःस्थाने सति प्रविश्य मण्डलस्थण्डिलाग्र एव बाह्यपरिवारद्वारदेवताचक्रपूजां पूर्वोक्तं च न्यासादि कुर्यात् न बहिः ॥ १३.१५

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

अगुप्ते तु बहिःस्थाने सति: जब वह बाहर सुरक्षित हो
प्रविश्य: प्रवेश करें
मण्डलस्थण्डिलाग्र एव: मंडल और स्थंडिल के अग्रभाग में
बाह्यपरिवारद्वारदेवताचक्रपूजां पूर्वोक्तं च न्यासादि कुर्यात्: बाह्य परिवार द्वारदेवताचक्र पूजा पूर्वोक्त अनुसार करें
न बहिः: बाहर न करें

हिंदी अर्थ: जब वह सुरक्षित रूप से बाहर हो, मंडल और स्थंडिल के अग्रभाग में प्रवेश करके, बाह्य परिवार द्वारदेवताचक्र पूजा पूर्वोक्त अनुसार करें; इसे बाहर न करें।

English Meaning: When safely outside, enter at the front of the Mandala and Standil, perform the external family door-deity circle worship as instructed earlier; do not perform it outside.

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

इत्य् एवं: इस प्रकार
संविन्महिमैव: स्वयं ही महिमामय
मूर्तिकृतं दिग्भेदं भासयति: विभिन्न दिशाओं में प्रकट होता है
इति दिक् न तत्त्वान्तरम्: दिशाओं में कोई अन्य तत्त्व नहीं है

हिंदी अर्थ: इस प्रकार, भगवान अपनी महिमा से सभी दिशाओं में प्रकट होते हैं; दिशाओं में कोई अन्य तत्त्व नहीं है।

English Meaning: Thus, the Supreme manifests in all directions through His glory; there is no other essence in these directions.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक दिशाओं में परमेश्वर की सार्वभौमिक उपस्थिति को स्पष्ट करता है। दिशाएं केवल उनकी दिव्यता का प्रतिबिंब हैं, स्वयं कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं रखतीं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

यथा यथा: जिस प्रकार-जैसे
स्वच्छाया लङ्घयितुम्: अपनी छाया को पार करना
इष्टा सती पुरः पुरो भवति: वह सामने-सामने स्थित होती है
तथा परमेश्वरमध्यताम् एति: उसी प्रकार परमेश्वर का मध्य अनुभव होता है
सर्वाधिष्ठातृतैव माध्यस्थ्यम् इत्य् उक्तम्: सभी अधिष्ठाताओं के माध्यम से मध्यस्थता होती है

हिंदी अर्थ: जिस प्रकार छाया को पार करते हुए वस्तुएँ सामने सामने दिखाई देती हैं, उसी प्रकार परमेश्वर का मध्य अनुभव सभी अधिष्ठाताओं के माध्यम से होता है।

English Meaning: Just as objects appear in front when their shadow is crossed, the centrality of the Supreme is experienced through all presiding deities.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक मध्यस्थता और दिव्यता का बोध कराता है। परमेश्वर की अनुभूति केवल एक आध्यात्मिक दृष्टि से ही संभव है, और सभी अधिष्ठाताओं द्वारा उनकी महिमा महसूस होती है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

एवं यथा: जैसा कि
भगवान् दिग्विभागकारी: भगवान जो दिशाओं को नियंत्रित करता है
सूर्योऽपि स हि पारमेश्वर्य् एव ज्ञानशक्तिर्: सूर्य भी केवल परमेश्वर का ज्ञान रूप शक्ति है
तत्र तत्र तत्र पूर्वं व्यक्तेः पूर्वा यत्रैव च: हर जगह पूर्व की ओर प्रकट
स्वात्माधीनापि स्वसम्मुखीनस्य देशस्य पुरस्तात्त्वात्: अपने आत्मा-अनुशासन और दिशा के अनुसार

हिंदी अर्थ: जैसे भगवान दिशाओं के नियामक हैं और सूर्य केवल परमेश्वर की ज्ञान शक्ति है, वैसे ही हर जगह उनका प्रभाव पूर्व की ओर प्रकट होता है और आत्मा के अनुकूल होता है।

English Meaning: As the Lord governs directions and the sun is the knowledge power of the Supreme, everywhere His presence is manifested in accordance with the orientation of the soul.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक परमेश्वर के दिग्विभागीय स्वरूप और सूर्य के ज्ञानरूप स्वरूप को स्पष्ट करता है। परमेश्वर हर दिशा में उपस्थित हैं, लेकिन प्रत्येक प्राणी के आत्मिक अनुरूप अनुभव होता है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

एवं: इस प्रकार
स्वात्मसूर्यपरमेशत्रितयैकीभावनया: आत्मा, सूर्य और परमेश्वर के त्रैत्व एकभाव के अनुसार
दिक्चर्चा: दिशाओं की चर्चा
अभिनवगुप्तगुरवः: अभिनवगुप्त गुरुओं के अनुसार

हिंदी अर्थ: इस प्रकार, आत्मा, सूर्य और परमेश्वर के एकत्व के अनुसार दिशाओं की व्याख्या अभिनवगुप्त गुरु के अनुसार की जाती है।

English Meaning: Thus, according to the unity of soul, sun, and Supreme, the discussion of directions is explained by the teachings of the Abhinavagupta lineage.

व्याख्या / Notes: अभिनवगुप्त का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि सभी दिशाओं और प्रकाश का अनुभव केवल दिव्य त्रैत्व (आत्मा, सूर्य, परमेश्वर) के एकत्व के माध्यम से होता है। यह आध्यात्मिक विज्ञान और दिग्विचार का अद्भुत संगम है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

एवं स्थिते उत्तराभिमुखम् उपविश्य: इस प्रकार उत्तराभिमुख बैठकर
देहपुर्यष्टकादौ अहम्भावत्यागेन: शरीर और शहर के आठ अंगों में अहंभाव त्याग
देहतां संनिधाव् अपि परदेहवत् अदेहत्वात्: देहत्व का अनुभव नहीं
तदुपरि यथोपदिष्टयाज्यदेवताचक्रन्यासः: इसके ऊपर जैसा निर्देश किया गया है, याज्य देवताओं के चक्र की स्थापना
प्राधान्येन च इह शक्तयो याज्याः: यहाँ शक्तियां और याज्य प्रमुख हैं

हिंदी अर्थ: इस प्रकार उत्तर की ओर मुख करके बैठें, अहंभाव त्याग कर शरीर को परदेह समझें, फिर ऊपर निर्देशित याज्य देवताओं के चक्र और शक्तियों की स्थापना करें।

English Meaning: Sitting facing north, renounce ego, perceive the body as non-body, and establish the circle of sacrificial deities and the associated powers as instructed above.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक याग के अंतिम चरण का मार्गदर्शन करता है। अहंभाव का त्याग, आत्मा की दृष्टि से शरीर का निराकार अनुभव, और याज्य देवताओं के चक्र का स्थापित होना याग को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है। यह चरण आध्यात्मिक अनुशासन और दिव्यता के अनुभव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

तदासनत्वात्: उस आसन से
भगवन्नवात्मादीनां शक्तेर् एव: भगवान और नवात्मा आदि की शक्तियों के द्वारा
च पूज्यत्वात्: पूज्य होने से
इति गुरवः: गुरु कहते हैं

हिंदी अर्थ: उस आसन में स्थित होने और भगवान व नवात्मा की शक्तियों के प्रभाव से पूज्यत्व की अनुभूति होती है।

English Meaning: By sitting in that seat, and through the powers of the Lord and the ninefold souls, one attains reverence, say the Gurus.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक आसन की पवित्रता और वहां स्थित दिव्य शक्तियों के महत्व को स्पष्ट करता है। केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि आसन और शक्तियों के संयोजन से ही पूज्य अनुभव होता है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

तत्र च: वहाँ भी
पञ्च अवस्था जाग्रदाद्याः: पांच अवस्थाएँ – जाग्रत आदि
षष्ठी च अनुत्तरा नाम: छठी अवस्था को अनुत्तरा कहते हैं
स्वभावदशा अनुसंधेया: इनका स्वाभाविक क्रम अनुसंधान करना चाहिए

हिंदी अर्थ: वहाँ पांच अवस्थाओं – जाग्रत आदि, और छठी जिसे अनुत्तरा कहते हैं – का स्वभाविक क्रम अनुसंधान किया जाता है।

English Meaning: There, the five states, starting with waking, and the sixth called Anuttara, should be observed in their natural sequence.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक ध्यान और साधना में मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं के क्रम को बताता है। प्रत्येक अवस्था का अनुभव और ज्ञान आध्यात्मिक प्रक्रिया को गहरा करता है।

हिंदी अर्थ: इस प्रकार, षोढा (16) न्यासों की स्थापना होती है।

English Meaning: Thus, sixteen types of Nyasa are established.

व्याख्या / Notes: षोढा न्यास आध्यात्मिक कार्यों और याग के दौरान शक्ति-संयोजन और दिव्यता की पूर्णता का प्रतीक हैं।

शब्द-दर-शब्द अर्थ:

तत्र कारणानां: वहाँ कारणों का
ब्रह्मविष्णुरुद्रेशसदाशिवशक्तिरूपाणां प्रत्येकम् अधिष्ठानात्: ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश, सदाशिव और उनकी शक्तियों के प्रत्येक आधार से
षट्त्रिंशत्तत्त्वकलापस्य: 36 तत्त्वों के समूह का
भैरवभट्टारकाभेदवृत्ते न्यासे पूर्णत्वात् भैरवीभावः: भैरव/भट्टारक के भेद अनुसार न्यास पूर्ण होने पर भैरवी भाव
तेन एतत् अनवकाशम्: यह बिना किसी रोक के होता है

हिंदी अर्थ: वहाँ ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश, सदाशिव और उनकी शक्तियों के आधार से 36 तत्त्वों का न्यास पूर्ण होने पर भैरवी भाव स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है।

English Meaning: There, through the foundation of Brahma, Vishnu, Rudra, Isha, Sadashiva, and their powers, upon completing the Nyasa of the 36 tattvas, the Bhairavi aspect naturally arises without obstruction.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक तत्त्वज्ञान और शक्तियों के संयोजन को स्पष्ट करता है। न्यास प्रक्रिया से दिव्य भाव उत्पन्न होता है, जो याग और पूजा को पूर्ण बनाता है।

हिंदी अर्थ: कहते हैं कि अतरंग में स्थित होकर पुनः न्यास के द्वारा तत्त्वों का सृजन होता है।

English Meaning: It is said that once positioned in the higher wave (Ataranga), the Nyasa again manifests the creation of the tattvas.

व्याख्या / Notes: अतरंग स्तर पर स्थित होना तत्त्वों की पुनः जागृति और उनके अनुभव का प्रतीक है। यह आध्यात्मिक उन्नति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण है।

हिंदी अर्थ: उस अतरंग में भैरव रूप ही है, जो अपने आत्मा में सृष्टि-संहार के अनंत रूपों को प्रकट करता है।

English Meaning: In that higher wave, the Bhairava form manifests countless variations of creation and dissolution within the self.

व्याख्या / Notes: यह श्लोक भैरव रूप और उसके अनंत सृष्टि-संहार शक्तियों को दर्शाता है। प्रत्येक शक्ति आत्मा में आभासित होती है और ध्यान/साधना के लिए मार्गदर्शक है।

हिंदी अर्थ: इस प्रकार, एक दूसरे के साथ मेलकर, प्राण, देह, बुद्धि आदि के रूप में परमेश्वरी को ध्यान में रखते हुए, बाहर और अंदर पुष्प, धूप, तर्पण आदि से यथासंभव पूजा करें।

English Meaning: In this way, by harmonizing among themselves, meditating on the Supreme as life, body, mind, etc., one should worship with flowers, incense, offerings, both inside and outside, as far as possible.

व्याख्या / Notes: यह अंतिम श्लोक परमेश्वरी की सर्वव्यापकता और पूजा की पूर्ण विधि का सार देता है। सभी शक्ति, तत्व और साधन मिलकर पूजा को प्रभावी और दिव्य बनाते हैं।

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