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उपनिषदों में मृत्यु का रहस्य

 

उपनिषदों में मृत्यु का रहस्य


उपनिषदों में मृत्यु का रहस्य

मृत्यु नहीं, परिवर्तन का दर्शन


प्रस्तावना

मृत्यु मनुष्य का सबसे बड़ा भय है।
लेकिन उपनिषद मृत्यु से डराते नहीं,
वे मृत्यु को समझाते हैं

जहाँ सामान्य दृष्टि में मृत्यु अंत है,
वहीं उपनिषद कहते हैं—

मृत्यु अंत नहीं,
बल्कि परिवर्तन का द्वार है।

उपनिषदों का ज्ञान
मनुष्य को भय से मुक्त करता है
और जीवन को गहराई देता है।


मृत्यु को लेकर उपनिषदों की दृष्टि

उपनिषद स्पष्ट कहते हैं—

जो जन्मा है, वह मरेगा;
पर जो आत्मा है, वह नहीं मरती।

मृत्यु शरीर की होती है,
आत्मा की नहीं

यह मूलभूत अंतर समझे बिना
उपनिषदों को समझना असंभव है।

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आत्मा क्या है? (उपनिषदों के अनुसार)

उपनिषद आत्मा को बताते हैं—

  • अजन्मा
  • अविनाशी
  • नित्य
  • चेतन

कठोपनिषद कहता है—

न जायते म्रियते वा विपश्चित्

अर्थात्—
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है।


मृत्यु क्या करती है?

उपनिषदों के अनुसार मृत्यु—

  • आत्मा को नष्ट नहीं करती
  • केवल शरीर का त्याग कराती है

जैसे—

मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर
नए वस्त्र धारण करता है

वैसे ही आत्मा
नया शरीर धारण करती है।

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मृत्यु के बाद क्या होता है?

उपनिषद दो मार्ग बताते हैं—

1️⃣ देवयान (ज्ञान का मार्ग)

जो—

  • आत्मज्ञान प्राप्त करते हैं
  • सत्य का अनुसरण करते हैं

वे ब्रह्म की ओर जाते हैं
और पुनर्जन्म से मुक्त हो जाते हैं।


2️⃣ पितृयान (कर्म का मार्ग)

जो—

  • केवल कर्म करते हैं
  • ज्ञान नहीं प्राप्त करते

वे पुनर्जन्म के चक्र में रहते हैं।


मृत्यु भय का कारण क्यों बनती है?

उपनिषद कहते हैं—

मृत्यु का भय
अज्ञान से उत्पन्न होता है।

मनुष्य—

  • शरीर को ही स्वयं मान लेता है
  • इंद्रियों में उलझ जाता है

इसलिए मृत्यु उसे
सब कुछ छीन लेने वाली लगती है।


नचिकेता और यम संवाद (कठोपनिषद)

नचिकेता का प्रश्न—

“मृत्यु के बाद क्या है?”

यम का उत्तर—

  • सत्य जानना कठिन है
  • लेकिन वही मुक्ति देता है

यह संवाद
उपनिषदों का हृदय है।


मृत्यु और मोक्ष का संबंध

उपनिषद कहते हैं—

जो जीवित रहते हुए
आत्मा को जान लेता है,
वह मरते समय नहीं डरता।

मोक्ष मृत्यु के बाद नहीं,
जीवन में प्राप्त होता है।


आज के जीवन में यह ज्ञान क्यों आवश्यक है?

आज मनुष्य—

  • मृत्यु से डरता है
  • बुढ़ापे से डरता है
  • खोने से डरता है

उपनिषद सिखाते हैं—

जो नश्वर को पकड़ता है,
वह दुखी होता है।


मृत्यु-ज्ञान का जीवन पर प्रभाव

जब मृत्यु समझ में आ जाती है—

  • अहंकार घटता है
  • लोभ कम होता है
  • करुणा बढ़ती है
  • जीवन अर्थपूर्ण बनता है

मृत्यु का ज्ञान
जीवन को गहरा करता है।


उपनिषदों का अंतिम संदेश

उपनिषद मृत्यु से कहते हैं—

तुम सत्य नहीं हो।

सत्य है—

आत्मा, ब्रह्म और चेतना।


निष्कर्ष

उपनिषद मृत्यु को
भय नहीं,
बोध का अवसर मानते हैं।

जो मृत्यु को समझ लेता है,
वह जीवन को सही अर्थ में जी लेता है।

यही कारण है कि
उपनिषद आज भी
मनुष्य को भय से मुक्त करते हैं।



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Agnipuran Chapter 20