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अथर्ववेद 4.36 – दुरात्माओं और पिशाचों से सुरक्षा मंत्र -
अथर्ववेद 4.35 – यम और ब्रह्माण्डीय उद्धार मंत्र
अथर्ववेद 4.34 – यज्ञ और विष्टारिण-मन्त्र – सुरक्षा, समृद्धि और लोकहित
अथर्ववेद 4.33 – सर्वदिशात्मक सुरक्षा, जीवनदायिनी ऊर्जा और द्वेषियों से रक्षा
अध्याय १०: अमृत का सृजन और नए यूनिवर्सल मानव का प्रादुर्भाव (Creation of Amrit & Birth of the New Universal Human