🔱 तंत्रसार – पञ्चदशम् आह्निकम् (Chapter 15)
संस्कृत:
यदा पुनर् आसन्नमरणस्य स्वयं वा बन्धुमुखेन शक्तिपात उपजायते तदा अस्मै सद्यः समुत्क्रमणदीक्षां कुर्यात् ॥ १५.१
हिन्दी अर्थ:
जब किसी व्यक्ति की मृत्यु समीप हो और उसमें स्वयं या किसी के माध्यम से शक्तिपात उत्पन्न हो, तब उसे तुरंत समुत्क्रमण दीक्षा देनी चाहिए।
English Explanation:
When a person is near death and receives divine awakening (Shaktipat), immediate initiation (Samutkrama Diksha) should be given to guide the soul beyond bondage.
संस्कृत:
समस्तम् अध्वानं शिष्ये न्यस्य तं च क्रमेण शोधयित्वा भगवतीं कालरात्रीम् मर्मकर्तनीं न्यस्य तया क्रमात् क्रमं मर्मपाशान् विभिद्य ब्रह्मरन्ध्रवर्ति शिष्यचैतन्यं कुर्यात् ॥ १५.२
हिन्दी अर्थ:
गुरु शिष्य में सम्पूर्ण तत्त्वों का न्यास करके उसे शुद्ध करता है, फिर कालरात्रि शक्ति द्वारा उसके बंधनों को काटकर उसकी चेतना को ब्रह्मरंध्र में स्थापित करता है।
English Explanation:
The Guru purifies the disciple by installing all principles within him and, through divine power, cuts the knots of bondage, elevating consciousness to the Brahmarandhra.
संस्कृत:
ततः पूर्वोक्तक्रमेण योजनिकार्थं पूर्णाहुतिं दद्यात् यथा पूर्णाहुत्यन्ते जीवो निष्क्रान्तः परमशिवाभिन्नो भवति ॥ १५.३
हिन्दी अर्थ:
फिर विधिपूर्वक पूर्णाहुति देकर जीव को परमशिव से अभिन्न बना दिया जाता है।
English Explanation:
Through the final offering (Purnahuti), the soul transcends and becomes one with Paramashiva.
संस्कृत:
बुभुक्षोस् तु द्वितीया पूर्णाहुतिः ॥ १५.४
हिन्दी अर्थ:
जो भोग की इच्छा रखते हैं, उनके लिए दूसरी पूर्णाहुति की जाती है।
English Explanation:
For those who still desire worldly experience, a second offering is performed.
संस्कृत:
भोगस्थाने योजनाय तत्काले च तस्य जीवलयः नात्र शेषवर्तनम् ब्रह्मविद्यां वा कर्णे पठेत् सा हि परामर्शस्वभावा सद्यः प्रबुद्धपशुचैतन्ये प्रबुद्धविमर्शं करोति ॥ १५.५
हिन्दी अर्थ:
भोग के स्थान पर स्थित करने के लिए, या उस समय ब्रह्मविद्या कान में सुनाई जाती है, जो तुरंत चेतना को जाग्रत कर देती है।
English Explanation:
The sacred knowledge (Brahmavidya) is whispered to awaken the consciousness instantly, guiding the soul toward liberation.
संस्कृत:
समय्यादेर् अपि च एतत्पाठेऽधिकारः ॥ १५.६
हिन्दी अर्थ:
इस उपदेश (दीक्षा विधि) को समय दीक्षा प्राप्त साधकों के लिए भी अधिकारपूर्वक बताया गया है।
English Explanation:
This teaching and method of initiation is also applicable to those who have undergone Samaya Diksha (basic initiation level practitioners).
संस्कृत:
सप्रत्ययां निर्बीजां तु यदि दीक्षां मूढाय आयातशक्तिपाताय च दर्शयेत् तदा हि शिवहस्तदानकाले अयं विधिः त्रिकोणम् आग्नेयं ज्वालाकरालं रेफविस्फुलिङ्गं बहिर्वात्याचक्रध्यायमानं मण्डलं दक्षिणहस्ते चिन्तयित्वा तत्रैव हस्ते बीजं किंचित् निक्षिप्य ऊर्ध्वाधोरेफविबोधितफट्कारपरम्पराभिः अस्य तां जननशक्तिं दहेत् एवं कुर्वन् तं हस्तं शिष्यस्य मूर्धनि क्षिपेत् इति द्वयोर् अपि एषा दीक्षा निर्बीजा स्वकार्यकरणसामर्थ्यविध्वंसिनी भवति स्थावराणाम् अपि दीक्ष्यत्वेन उक्तत्वात् वायुपुरान्तर्व्यवस्थितं दोधूयमानं शिष्यं लघूभूतं चिन्तयेत् येन तुलया लघुः दृश्यते इति ॥ १५.७
हिन्दी अर्थ:
यदि किसी अयोग्य या अचानक शक्तिपात प्राप्त व्यक्ति को निर्बीज दीक्षा दी जाती है, तो गुरु विशेष ध्यान विधि से अग्निमय त्रिकोण का ध्यान करके, मंत्र शक्ति द्वारा उसके कर्मबीज को नष्ट करता है। फिर उस हाथ को शिष्य के सिर पर रखकर उसकी जन्मशक्ति को जला देता है। इस प्रकार यह दीक्षा कर्म करने की शक्ति को समाप्त कर देती है और शिष्य को अत्यंत हल्का, बन्धनरहित बना देती है।
English Explanation:
In the case of an unprepared or suddenly awakened individual, a seedless initiation (Nirbija Diksha) is performed. The Guru visualizes a fiery triangle and uses mantra power to burn the karmic seeds. By placing the energized hand on the disciple’s head, the creative force of bondage is destroyed, making the soul light, मुक्त, and beyond karmic activity.

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